मंगलवार, 12 मई 2015

बड़ा फ़िरागे दिल वो मेरा यार है,
बेमुरव्वत मैं उसे मुझसे प्यार है। 
मैंने कसमें वादें तोड़े तमाम हैं,
उसको फिर भी मेरा इन्तजार है।
नजरे कर्म है करता बरसे रहमतें,
उस पे शक मैं करता न एतबार है।
अपने दुश्मनों से मैंने दिल लगाया,
रिश्तों को हमने किया तार तार है।
नासमझ मैं कुछ समझता ही नही,
लौट कर ये फिर न आनी बहार है। 
माफ़ कर रैना"तेरी सारी गल्तियां,
गले लगाने को वो फिर भी तैयार है।रैना" 
माँ तेरा ही सहारा,कहीं दूर है किनारा,
इस जग से मैं हारा,मन ने तुझको पुकारा,
तू दाता माँ जगत विधाता कर सकती है,
मेरा दुखड़ा पल में मईया हर सकती है। 
मेरा दुखड़ा वैष्णो माता  ------------
वैष्णो महारानी की जब कृपा हो जाये,
अंधा देखे बहरा सुने गूंगा भजन है गाये,
बिगड़ी हुई जिन्दगी यहां संवर सकती है। 
मेरा दुखड़ा वैष्णो माता --------
भक्त पुकारे तेरा जलवा दिखा दे मईया 
दुःख चिन्ता जो भारी है मिटा दे मईया,
खुशियों से माँ मेरी झोली भर सकती है। 
मेरा दुखड़ा वैष्णो माता ------------रैना"
सुप्रभात जी ------------जय जय माँ 
गम मिले तो मन उदास मत करना,
अपनों से मदद की आस मत करना,
प्यार में अक्सर लोग धोखा करते है,
भूल कर भी तू विशवास मत करना। रैना" 
दुनिया की फितरत अब जान ली मैंने,
पर्दे के पीछे की सूरत पहचान ली मैंने,
गर यूं उलझे फिर कुछ हासिल न होगा,
तभी उससे दिल लगाने की ठान ली मैंने। रैना"
खूब हसीं हो तारीफ के काबिल,
कोई कमी नही तुम हो कामिल,
सनम तेरे बगैर मेरा वजूद नही,

मेरी जिंदगी में तुम हो शामिल। रैना"

दुआ मांगते बददुआ नही देते,
सूफी किसी को दगा नही देते।
बसे घर किसी का जतन करते,
बुझे शोलों को  हवा नही देते।
बड़े बेदर्द होते हैं ये हुस्न वाले,
जख्म लगाते पर दवा नही देते।
जिसे जाना उठ के वो चला जाये,
कभी पीछे से हम सदा नही देते।
हर तरफ है दुर्गन्ध का आलम,
बजते साज भी अब मजा नही देते।
इस हाल में जीना बहुत मुश्किल,
क्यों रैना"को मरने की सजा नही देते। रैना"
    

सोमवार, 11 मई 2015

तुम हसीन हो बाकमाल है सादगी तेरी,
न जाने कितने करते होगे बन्दगी तेरी,
जमाने की नजरों से खुद को संभाले रखो,
बेशक बेहिसाब कीमती है जिन्दगी तेरी।  रैना"
मेरी मुश्किल करो आसान वैष्णो रानी माँ,
तेरा भक्त्त बड़ा परेशान वैष्णो रानी माँ। 
मेरी मुश्किल करो -----------------
मैंने जिसको अपना जाना
उसने समझा गैर बेगाना,
अब वो मेरा करे अपमान वैष्णो रानी माँ। 
मेरी मुश्किल करो ----------------
दुःख बहुत माँ मुझको सम्भालो,
मेरे पैर से माँ काँटा निकालो,
मेरी आफत में आई जान  वैष्णो रानी माँ। 
मेरी मुश्किल करो -------------रैना"
सुप्रभात जी ----------------जय जय माँ 
 दोस्तों जरूर पढ़े

जो भी नशे से दूर होता है,
वो न कभी मजबूर होता है।
जिसका कर्म फ़क़त सेवा,
वो सरे शहर मशहूर होता है।
 एक दिन वो टूट ही जाता,
अभिमानी जो मगरूर होता है।
जिस्म मिट्टी मिट्टी में मिले,
कुछ को फिर भी फितूर होता है।
वो हर किसी का हिसाब लिखता, 
रैना" इनता तो जरूर होता है। रैना"



टूट के प्यार करने की जिद्द है,
तेरा दीदार करने की जिद्द है। 
रुख से पर्दा हटा लो सनम,
आंखें चार करने की जिद्द है। 
सजन को मिलने के खातिर,
दरिया पार करने की जिद्द है।
दिल के वीरान गुलशन को,
गुले गुलजार करने की जिद्द है।  
खुद पे तो भरोसा नही रैना"
उस पे एतबार करने की जिद्द है। रैना"

रविवार, 10 मई 2015

अनजाने में अटक गया हूं,
माँ मैं रास्ता भटक गया हूं,
कुछ मेरा भी कर ले ध्यान माता।
अब मेरा भी कर कल्याण माता।
मेरी माँ ---------------------
जिनके लिए मैंने पीड़ा सही है,
उनको न मेरी चिन्ता रही है,
वो करते मेरा अपमान माता।
कुछ मेरा भी कर ले ध्यान माता।
मेरी माँ -----------------------
मन में मचा घमासान बहुत है,
माँ तेरा बच्चा परेशान बहुत है,
आफत में आई मेरी जान माता।
कुछ मेरा भी कर ले ध्यान माता।
मेरी माँ ----------------------
वैष्णो रानी सुन मेरी पुकार माँ,
अपने बच्चे पे कर उपकार माँ,
मुझे भक्ति का दे दे दान माता।
कुछ मेरा भी कर ले ध्यान माता।
मेरी माँ -----------रैना"
सुप्रभात जी ---------जय जय माँ

बड़ा फ़िरागे दिल वो मेरा यार है,
बेमुरब्बत मैं उसे मुझसे प्यार है। 
मैंने कसमें वादें तोड़े तमाम हैं,
उसको फिर भी मेरा इन्तजार है।
नजरे कर्म है करता बरसे रहमतें,
उस पे शक मैं करता न एतबार है।
उनसे दिल लगाया जो मेरे दुश्मन,
रिश्तों को हमने किया तार तार है।
धर्म कर्म  की बातें अच्छी लगे किताबों में,    

हम नही मिलते उसे तो इन्तजार है,
बेमुरब्बत हम उसको हमसे प्यार है। 
मैं नही मिलता वो मिलने को तैयार है, 
बेवफा मैं से भी उसको सच्चा प्यार है। 

गर्मी के मौसम में माँ ठण्डी हवा है,
माँ की हर अदा में वफ़ा ही वफ़ा है,
माँ की तारीफ को अल्फाज नही,
बच्चों के लिए मांगे दुआ ही दुआ है। रैना"

बच्चा जागे तो माँ कब सोती है,
चोट बच्चें को लगे माँ रोती है,
निस्वार्थ निष्भाव त्याग करे,
माँ तो ममता की देवी होती है। रैना"



शनिवार, 9 मई 2015

बुरा न  मान जाना हास्य व्यंग्य है
माँ के गले लग सोना सीखा,
हंसना सीखा ओ रोना सीखा,
बीवी ने भी कुछ सिखाया है,
बर्तन माझना कपड़े धोना सीखा। रैना"
मातृ दिवस पर माँ को समर्पित रचना
मैं बताता हूं माँ कैसी है,
एकदम रब के जैसी है।
निश्छल निश्भाव जैसे पानी रमता,
बिल्कुल ऐसी होती माँ की ममता।
माँ कहती नही कुछ चुप रह जाती है,
धरती के जैसे सारे दुःख सह जाती है।
सूरज की किरण जैसे अँधेरा मिटाती है,
ऐसे ही माँ रोशन जहान दिखाती है।
जीवन दानी जिस प्रकार हवा होती,
ऐसी ही वरदानी माँ की दुआ होती।
अर्श खुशियों की वर्षा से धरा को भिगोता  है,
ऐसे ही माँ का विशाल हृदय होता है।
ताउम्र कानों में कोयल सी गुनगुनाती है,
माँ कभी बच्चों से दूर न जाती है।
रैना"इसलिये कभी न घबराया है,
अक्सर मेरी माँ ने हौसला बढ़ाया है। रैना" 


रंगहीन बदरंगी है तस्वीर मईया,
बना दे कोई ऐसी तदबीर मईया,
हरपल जवां रहे तेरे दीद की तलब,
तू रैना"की बदल दे तकदीर मईया।
आ बैठे माँ दर पे तेरे कर तहरीर बदली,
हम हो गये दीवाने तेरे कर तकदीर बदली।
माँ कर तहरीर बदली --------रैना"
सुप्रभात जी --------जय जय माँ 
दोस्तों मैंने लिख दिया क्या ऐसा भी लिखा जा सकता है जरूर बताये।
क्या लिखा,
जो दिखा।
 ये बता,
क्या खता।
सुन ज़रा,
क्यों डरा।
ऐ जफ़ा
कर वफ़ा।
क्या हुआ,
दे दुआ।
मत लगा,
दिल जला।
कर भला,
ऐ खुदा। रैना"

शुक्रवार, 8 मई 2015

मैं नही लिखता लिखवाता है कोई,
मेरे दिमाग की कलम चलाता है कोई। रैना"


खोल रखे है मैंने घर के खिड़कियां दरवाजे सारे,
इसलिये मेरे घर पर तूफ़ान का कुछ खास असर नही होता। रैना"

आओ माँ से विनती करे

तेरे इशारे के बिना माँ इक पत्ता भी हिलता नही,
कली भी मुस्कराती नही फूल भी खिलता नही।
फिर मैं कैसे तेरी मर्जी के बिना काम कोई कर लूं गा,
दुःख दर्दों से छुटकारा पा खुशियों से झोली भर लूं गा।
मैंने हंसना या रोना है,
माँ तेरी मर्जी से होना है।
दर आये मनवा प्यासा लिये,
सिर्फ दर्शन की अभिलाषा लिये।
अब अर्जी मेरी स्वीकार करो,
अपने बच्चों से माँ प्यार करो,
प्यार करो माँ प्यार करो,
भव से मुझको पार करो।
माँ वैष्णो हम को प्यार करो ------रैना"
सुप्रभात जी --------जय जय माँ    
मेरी क्या औकात जो मैं हालात बदल सकता,
गिरना मेरा नसीब था फिर कैसे संभल सकता,
रहना था मुझको तेरे कदमों की ठोकरों में ही,
रैना" फिर भला  कैसे तुझसे दूर निकल सकता। रैना"

गर्दिश के दिन जब आया करते है,
जानने वाले अनजान बन जाया करते है। रैना"
भारत माता तन्हा बैठ कर फूट फूट के रोती है,
सोचती भारत में???????
जुर्माना कैद सजा क्या गरीब को होती है।
ये बात बिल्कुल एकदम पक्की है,
क्योकि इंसाफ की देवी ने आँखों पे बांध रखी पट्टी है। रैना"
ग़ज़ल बन के तेरे होठों पे तैरना मुझको,
मैं मुसाफिर तेरे दिल में ठहरना मुझको।
मेरी वफ़ा का अन्दाजा तुझको तब होगा,
सफ़ेद लिबास जिस दिन पहरना मुझको।रैना"
तुम महफ़िल में चाहे मेरा जिक्र न करो,
इस बदकिस्मत का बेजा फ़िक्र न करो,
अपनी परछाई से चाहे मुझे दूर करदो,
गुजारिश है कभी इधर की उधर न करो। रैना"

लोग छेड़ते अब मुझे तेरा नाम लेकर,
तुम हो की चिलमन से बाहर नही आते। रैना"

बेअसूल शहर में असूलों की बात करता है,
कांटों के पैदावार है फूलों की बात करता है,
सावन का महीना भी सूखा ही गुजर जाता,
रैना"बता तू  किन झूलों की बात करता है।रैना"
 

गुरुवार, 7 मई 2015

तरस रही हैं आंखियां प्यासी,
बरस रही हैं आंखियां प्यासी,
भक्तों पे करो उपकार मेरी माँ,
तलबे दीदार इंतजार मेरी माँ।
भक्तों पे करो -------------
नादान बच्चे करते गुस्ताखी है,
दयावान वैष्णो माँ देती माफ़ी है,
क्या गल्ती मेरी,जो कर दी देरी,
मनवा उदास है बेजार मेरी माँ।
भक्तों पे करो ---------रैना"
सुप्रभात जी -------जय जय माँ 

बुधवार, 6 मई 2015

मतलब की दुनिया मतलब की बातें, मतलब को मिलन होती मुलाकातें,, मतलब को भूले वादें रस्में कसमें,
सोच लें रैना"आने वाली काली रातें। रैना"

दोस्तों के लिए खास

बेशक कड़ी मेहनत अपना रंग दिखाती है,
लेकिन किस्मत भी अपना फर्ज निभाती है,
वक़्त बेदर्द इस की चोटों से बचना मुश्किल,
बुरी घड़ी आती तो तदबीर धरी रह जाती है।रैना"
बेशक कड़ी मेहनत तो अपना रंग दिखलाती है,
लेकिन हांथों की लकीरें भी अपना फर्ज निभाती है,
वक़्त बड़ा बेदर्द हुआ इस की चोटों से बचना मुश्किल,

मंगलवार, 5 मई 2015



अच्छे दिन आने के वादे हाये किधर गये,
एक साल होने से पहले ही सारे बिखर गये। 





*

अच्छे दिन आने की तलाश अधूरी रह गई,
जनता के हिस्से में फिर मजबूरी रह गई।
हर खाते में 15 लाख आने है स्विट्जरलैंड से,
ताला खोलने वाली बस चांबी जरूरी रह गई। रैना"

15 लाख मिलने की आस अधूरी रह गई,
आयेगे दिन बहार के मचाया शोर था,
अब रो रही जनता प्यास अधूरी रह गई।
भाषण के रथ पे चढ़ किला जीत लिया,
वन रैंक वन पैंशन देने का किया वादा,
फौजी कहते बात खास अधूरी रह गई। 
मेरी माँ अपने भक्तों को चरणों से लगा लेना,
माँ इक तेरा सहारा है तू गिरते को उठा लेना,
बड़ी ही दूर मंजिल है रास्ते भी बड़े ही मुश्किल
माँ वैष्णो कर देना कृपा भटकन से बचा लेना। रैना"
सुप्रभात जी ------------जय जय माँ


अच्छे दिनों की तलाश अधूरी रह गई,
15 लाख मिलने की आस अधूरी रह गई,
आयेगे दिन बहार के मचाया शोर था,
अब रो रही जनता प्यास अधूरी रह गई।
भाषण के रथ पे चढ़ किला जीत लिया,

वन रैंक वन पैंशन देने का किया वादा,
फौजी कहते बात खास अधूरी रह गई। 

दुनिया तुझे बेवकूफ बनाती रहेगी,
उधार मत देना दोस्ती जाती रहेगी।
तू सूरज के मानिंद चमक तो सही,
ये कयानात पलकों पे सजाती रहेगी।
तू चाहे चला जा अपना घर छोड़ कर,
माँ तो फिर भी तेरे गीत गाती रहेगी।
साथ जले न जले परवाने की मर्जी,
लेकिन शमा खुद को जलाती रहेगी।
असर तो दिखाती है बुजुर्गों की दुआ,
रैना"हर आफत से दुआ बचाती रहेगी। रैना"  
जिंदगी का गीत जिसे गाना आ गया,
कदमों में उसके तो जमाना आ गया।
हर दिल उस पर हो जायेगा फ़िदा,
घरे मिटटी जिसको सजाना आ गया।
उसके लिये ही खुला हर दरवाजा,
काम कर जिसको दिखाना आ गया।
मायूस वो तो कभी होगा न उदास,
जिसे खुद औरों को हंसाना आ गया।
 इस दौर में उसे मिलती कामयाबी,
जिसको परख़ शिकार फ़साने आ गया। 
रैना" की जिन्दगी तो फ़टा ढोल सा,
मजबूरी में इसे भी बजाना आ गया।  रैना"
मैं भी गिनती में शुमार हो जाता,
गर सिर झुकाना आता मुझको। रैना"


आजकल कामयाब होना मुश्किल नही,
सिर्फ मसका लगाना सीख लो। रैना"


फ़क़त सिफारिश होनी चाहिये,
अनपढ़ काट न सही ?????
टिकटें फाड़ तो सकता है।रैना" 

सोमवार, 4 मई 2015

तीन दिन की कहानी ये जिंदगानी,
जानते हुये भी न किसी ने जानी। 
बचपन में भुला जवानी में नादानी,
बुढ़ापे में रोया हो गई खत्म कहानी। रैना"
तेरे दर्शन को मेरी माता भटक रहा जमाना है,
कैसे होगे माँ तेरे दर्शन न भेद किसी ने जाना है,
रैना" भी तेरा पुजारी तेरे दर्शन का अभिलाषी है,
वैष्णो माँ ये बतला मैंने क्या वो फर्ज निभाना है।
अभिलाषी भक्त खड़े तेरे दर पे  कर उपकार मेरी माँ,
सिवा इसके न हसरत हमारी करने दीदार मेरी माँ।   रैना"
तीन दिन की कहानी ये जिंदगानी,
जानते हुये भी किसी ने न जानी। 

दोस्तों एक बार जरूर पढ़ना गुजारिश है

होगे सब जल्दी में किसी को रंजो गम न फ़िक्र होगा,
विदा करने वाले कितने थे महफ़िल में यही जिक्र होगा,
अच्छा था या बुरा रैना" लोग इसी से हिसाब लगायेगे,
मतलब के हिसाब से ही मेरी अर्थी पे फूल चढ़ायेंगे।
उन फूलों का जिक्र  होता है जो महकाते गुलशन को,
काम कोई ऐसा कर रैना" तू चले तो दुःख हो दुश्मन को।
दुश्मन बनाना आसां बहुत पर दोस्त बनाना मुश्किल है,
गर दोस्त कोई बन जाये फिर दोस्ती निभाना मुश्किल है।
जीना मुश्किल मरना मुश्किल,मुश्किल दुनियादारी है,
मत कर मोहब्बत की बातें हर कोई यहां व्यापारी है। रैना"

रविवार, 3 मई 2015

मेरा मन है मईया प्यासा,
तेरे दर्शन की अभिलाषा,
ये अर्ज है हमारी,माँ कर के शेर सवारी,
मेरी इच्छा पूरी करदो,आ जाओ एक बारी।
आ जाओ एक बारी -----------------
फैला है घना अन्धेरा,कहीं दूर बसा सवेरा,
मन दुखी परेशान बहुत,हमको गम ने घेरा,
यहां कोई संगी न साथी, माँ विनती सुनो हमारी।
आ जाओ एक बारी --------------रैना"
सुप्रभात जी --------------जय जय माँ 
सूरज भी रोशनी के लिये तरसता है,
बीच चौराहे खड़ा छम छम बरसता है,
मेरे देश की हालत कुछ ऐसी ही हो गई,
मुर्गमसल्म खाता कोई भूखा तड़फता है।रैना"

हमारी सोच का पूरी तरह बेड़ा गर्क है
तभी यहां आदमी आदमी में बड़ा फर्क है,
कहने को तो भारत देश देवों की धरती,
लेकिन नेताओं ने बनाया बदतर नरक है। 
दिल का टूटना अब आम हो गया,
 हुस्न कहीं इश्क बदनाम हो गया।
आँखों से हुस्न ने पिलानी छोड़ दी,
इश्क की पसन्द अब जाम हो गया।  रैना"

दोस्तों की नजर गज़ल
मात्रा =16 ( 2 2 2 2 2 2 2 2 )
रुतबा तब ही हासिल होगा,
तप तप के तू काबिल होगा।
गैरों से तू मत घबराना,
कोई अपना कातिल होगा।
बूढ़ों को दुःख देने वाला,
बेशक कोई जाहिल होगा। 
उसकी मस्ती तब ही चढ़ती,
जब दीवाना पागल होगा।
अक्सर करता तौबा तौबा,
रैना"का दिल बिस्मिल होगा।
बिस्मिल=जख्मी  
दिल का वो सब्रोकरार गुम है,
नफ़रतें जवां हुई प्यार गुम है,

बुरा दौर चल रहा है खुद को संभाले रखना,
आँखें खुली हो लेकिन होंठों पे ताले रखना।
भीड़ में रह के जीना ये जीना भी क्या जीना,
हो अलग मिजाज तेरे अंदाज निराले रखना।रैना"


शनिवार, 2 मई 2015

मुझ पे इतनी कृपा करो आसान जीवन की डगर हो माँ,
हरपल तेरा ही ध्यान करू हर कर्म तेरे ही नज़र हो माँ।
रैना"भटकू न मैं द्वारे द्वारे सोच खुद ही खुद में खोज करू,
साफ शुद्द मन का मन्दिर इस मंदिर में तेरा घर हो माँ। रैना"
सुप्रभात जी ---------------------------जय जय माँ 
मन में जज्बा ए कामयाबी होना चाहिये,
फिर तो मंजिल खुद सिर झुका लेती है। रैना"


तू अपनी उम्मीदों को जवान रख,
वक़्त का क्या बदल जाया करता है। रैना"



अब मेरी कलम के चर्चे नही इतने,
मेरे बाद लोग जरूर पढ़ेंगे मुझको। रैना"





युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने वो कर दिखाया है,
रैना"जैसे इक जरे को आफ़ताब सा चमकाया है।
इस वीरां गुलशन को नसीब न हुई थी बहार कभी,
लेकिन इस ग्रुप के एडमिन ने चमन महकाया है।
सच कहता हूँ मैं बदकिस्मत कलम का पुजारी,
मेरे जीवन में ये हसीं मौका पहली बार ही आया है।
फले फुले खुश रहे इस मंच के  मेम्बर जन सारे,
सूफी रैना"ने दुआ मांगी दिल से ये फ़रमाया है। रैना"

शुक्रवार, 1 मई 2015

कितनी बार बदले कपड़े रूप भी सजाया है,
अफ़सोस फिर भी पीया के मन न भाया है,
अब की बार भी पी को न भाये अन्दाज मेरा,
क्योंकि किया वादा मैंने फिर न निभाया है। रैना"
मुस्कान खो जाये ऐसी कोई सूरत नही है,
तुम हसीं हो जेवर पहनने की जरूरत नही है,
तेरी हर अदा दुआ के जैसी लगती है सनम,
बददुआ दे ऐसी तो किसी में हिम्मत नही है। रैना"


इस दौर में चम्मचागिरी की दरकार है यारों,
वरना कड़ी मेहनत भी एकदम बेकार है यारों,
मसका लगाने का गर ठेका ले लिया अपने ने,
फिर तो मौज ही मौज जीवन में बहार है यारों। रैना"
दो दिन पहले किसी की दो दिन बाद होती,
अरमानों की बस्ती हर हाल आबाद होती,
वैष्णो महारानी रहमत मेहर करने वाली
कबूल यहां हर किसी की फरियाद होती। रैना"
सुप्रभात जी ---------------जय जय माँ 
जख्म खाकर भी मुस्करायेगी किरण,
लफ्जों से चमन को महकायेंगी किरण,
बेशक अब तो किरण कविता हो गई है,
सारी दुनिया में परचम फहरायेगी किरण। रैना"
आया जलजला मची तबाही,
मदद को सारी दुनिया आयी।
लेकिन मेरा तो हाल न पूछा,
दिल ज़ख्मी महले ख्वाब टूटा।
गम नही ये अफ़सोस है मुझको,
गले लगा के अपने ने है लूटा।
चाल अपनी वक़्त ने चली होगी,
आसमां से तभी सितारा टूटा।
मौत तो इक अटल सच्चाई है,
जी के जाना जीवन कोरा झूठा।
किसी की खता कसूर नही कोई,
रैना" से उसका मुकद्दर है रूठा। रैना"
ये बता तू इतना खफा होता क्यों है,
अपनों को रुला के फिर रोता क्यों है। 





दर्द कितना दिल में ये बताना मुश्किल है,
क्योंकि इसका हिसाब लगाना मुश्किल है,
देख लेता तू भी तुझको शक न रहता कोई,
अफसोस दिल चीर कर दिखाना मुश्किल है।
दिल ने दर्द खिलौने को छुपा छुपा के रखा,
लेकिन चेहरे से  इसे तो छुपाना मुश्किल है।
जनता क्या करे मसीहा हो गये बेईमान,
गद्दारों से देश को अब बचाना मुश्किल है।
रैना" की ये आदत कुछ अलग ही काम करे,
बुझदिलों के जैसे आंसू बहाना मुश्किल है। रैना"