बुधवार, 30 नवंबर 2011

kbhi gaur se tum

कभी गौर से अपनी नादानी देखो,
मेरी आँखों से छलकता पानी देखो.
खता तेरी या कसूर मेरे नसीबो का,
बरबाद हो गई मेरी जिंदगानी देखो.
डूब कर गिलासों में तबाह हो गई है,
कभी चढ़ी थी मचल के जवानी देखो.
किताबे दिल का कोई पेज नही कोरा,
खून से लिखी गमगीन कहानी देखो.
भूल गया हुआ मैं खुद को भी यारों,
आइना में दिखती सुरत बेगानी देखो.
बाद कयामत के भी वादे से न मुकरा,
बेशक "रैना"शख्स है खानदानी देखो."रैना"

सोमवार, 28 नवंबर 2011

indar de khade vich

beshak tu indar de khade vich rijha nal gavega,
manaka ithe sanu kaliya das hun kon sunavega.

चलो अब ये जरूरी काम भी किया जाये,
तन्हा बैठ दो घड़ी उसका नाम लिया जाये.
 नही दे सकते जो किसी को हम ख़ुशी यारों,
किसी को भूल कर भी तो गम न दिया जाये.
शराब का पीना भी भला क्या कोई पीना है,
जाम ए इश्क उसके नाम का ही पिया जाये."रैना"

teri murli ki mithhthhi tan

तेरी मुरली की मिठ्ठी मिठ्ठी तान,
काना मोहे अच्छी लागे,
जाऊ वारी वारी मैं तो कुर्बान,
 काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे...................तेरी मुरली की ........
तेरी मुरली की धुन जब बाजे,
नाचे मेरा अंग अंग रूह मेरी नाचे,
हुई भवंरी मैं  जग ये हैरान.

काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे.................तेरी मुरली की ........
"रैना" कहे काना इक बार फिर आ जा रे,
मिठ्ठी मिठ्ठी प्यारी मुरली सुना जा रे,
आके धर्म की रख ले आन.

काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे........तेरी मुरली की .............
सुप्रभात जी .................................good morning ji



kash tujhe preshan kre

काश तुझको भी परेशान करे मेरी यादें,
जैसे मेरी परेशानी का सबब तेरी यादें."रैना"
यारों ने जिद्द है पकड़ी पीनी शराब है,
 खूब मस्त बहाना मौसम खराब है."रैना"
काश कोई मुझे वाजिव दाम देता,
फिर तो मैं दिल का सौदा कर लेता."रैना"
बेशक बसती है दुनिया उस पार भी,
कभी झाँका तो करो घर के बाहर भी."रैना"
जब भी मौसम सर्द होता है,
दिल में हल्का सा दर्द होता है."रैना"
आजकल हम अपना अंदाज निराला रखते,
आँख कान खुले मगर होठों पे ताला रखते.
हर जगह बैठे है रिशवत खाने वाले ही कुत्ते,
हम काम करवाने को हाथों में निवाला रखते.
लाखों का काम इक बोतल मजे से करवा देती,
मतलब निकलवाने को सामने है प्याला रखते.
पंडित ने बताया ग्रहों का असर काफी कम होगा,
काम न रुके कोई तभी पाल के कुत्ता काला रखते.
माँ बाप बहन भाई से तो अक्सर रहती अनबन,
मगर बड़े आदर के साथ घर सास औ साला रखते.
"रैना" शैम्पू से धो चेहरे को तेल लगा चमकते है,
ये अलग बात है हम अपने दिल को काला रखते."रैना"


शनिवार, 26 नवंबर 2011

lakshya nishana


जिन्दगी का लक्ष्य निशाना होना चाहिए,
ये भी जरूरी है कोई हंगामा होना चाहिए.
एक ही रास्ते पे चले सारे शहर के लोग,
जिन्दगी का अंदाज निराला होना चाहिए.
रंग काला इस से कोई पड़ता नही फर्क,
मगर दिल कभी भी न काला होना चाहिए.
"रैना" चैन से जीने का इक ही मन्त्र खास,
आँखें खुली मगर होंठों पे ताला होना चाहिए. "रैना"

jb bhi yad aate


वो पुराने किस्से,
जब भी याद आते है,
दिल बहुत दुखाते है."रैना"


जबसे खुद पे गुमान होने लगा,
तबसे आइना देखना छोड़ दिया.
खो न जाये आईने में मेरा वजूद
इसलिए ही आइना है तोड़ दिया.  "रैना"
जबसे खुद पे गुमान होने लगा,
तबसे आइना देखना छोड़ दिया."रैना"

चाहत तो इबादत है किसी को मजबूर क्या करना,
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"
चाहत तो इबादत है किसी को मजबूर क्या करना,
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"

aankho se duri ho jati,

बेशक राहे जिन्दगी में कोई ऐसी भी मज़बूरी हो जाती,
मगर दिल से दिल न दूर होता चाहे आँखों से दूरी हो जाती."रैना"

lakir khichwaye

राहुल का सवाल ????????????????
माया का माया जाल,
उतर प्रदेश को कर दिया कंगाल,
फिर राहुल जी ये बताओ ????????????
मनमोहन सिंह जी के बारे में,
आप का क्या ख्याल,
जिन्होंने महंगाई की मार से जनता कर दी बेहाल.
राहुल जी का कहना ???????????????????
प्रधानमंत्री ईमानदार.
जनता का कहना ????????????????????
क्या इसलिए हो रही घोटालो की भरमार.
ऐसी ईमानदारी हमें नही स्वीकार
देश की हो रही बदनामी और जनता लाचार.
 "रैना"

kya khak

कोई जनून बाकी न रहा,
दिल में खून बाकी न रहा,
कैसे जीये अब तेरे शहर में,
चैन ओ सकून बाकी न रहा."रैना"

wah iaene ka bhi ajib

वाह आईने का भी अजीब मिजाज है,
बेख़ौफ़ सबको सच सच कह देता है."रैना"

वो दूर बैठा मुसल्सल इशारा करता रहा,
मैं उसकी हर अदा से किनारा करता रहा.
बेशक उसकी हर अदा काबिले तारीफ है,
वैसे"रैना"इन नजरों से नजारा करता रहा."रैना"
  मुसल्सल=निरंतर 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

chinta fikar se dur

बेशक चिंता फिकर से दूर लम्बी तान के सोना चाहिए,
मगर इस जिन्दगी का कोई मकसद खास होना चाहिए,
गर कयामत के आ जाये दिन कोई मुसीबत आन पड़े,
फिर भी आँखों से छलके न आंसू सिर्फ दिल रोना चाहिए.
दुनिया की इस भीड़ में अक्सर खो जाये है सजो सामान,
इत्मिनान ही बेहतर है कभी होशो हवास न खोना चाहिए.
बदलते वक्त के साथ ही इन्सान भी है चोंगा बदल रहा,
"रैना"बदलो अंदाज मगर इंसान को इंसान होना चाहिए."रैना"
सुप्रभात जी ......................................good morning ji

शनिवार, 19 नवंबर 2011

jmana badl gya

जमाना बदल गया,
 बदल गया प्यार,
बदल गये भाई बंधू,
 बदला सारा संसार.
जमाना बदल गया ......................
धर्म के नाम पे करे लड़ाई,
भाई का दुश्मन बना भाई.
 अब चुप पीठ पे करते वार.
जमाना बदल गया ......................
अख़बारों में यही कहानी,
कही आग तो कही पानी,
इन्सां हद से हो गया पार.
जमाना बदल गया ......................"रैना"

khushi hai tumse milege

बेशक मंजिल की और बढ़ते ही जा रहे,
मदहोश है कुछ होश नही सब गवा रहे.
हमको खबर हरगिज जो साथ न चलेगे,
फिर भी देखो हम उन्हें अपना बना रहे. "रैना"

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

mai to dekho tut

मैं तो देखो टूट गया हूँ ऐसे,
अर्श से तारा टूट गया जैसे.
मेरी खता कोई कसूर नही,
फिर जुल्म क्यों हुआ कैसे.
लड़की जवान कुआरी बैठी,
बाप गरीब के पास नही पैसे.
गम के बोझ में दबा इन्सां,
दिल रोता होठों पे हंसी वैसे."रैना"

mujh se dil lgane se

मुझसे दिल को लगाने से पहले,
सोच लेना शमा जलाने से पहले.
बन न जाये कही मरने का सबब,
मौत ढूंढ़ती बहाना आने से पहले.
सम्भाल लेना सजो सामान सारा,
आतिशे उल्फत भड़काने से पहले.
अच्छी तरह से सोच समझ लेना,
अपना नया घर बसाने से पहले.
तू चाहे लाख सितम ही कर लेना,
रैना"भूले न तुझे मर जाने से पहले. "रैना"

mujhe gam nhi mar

 गम नही मुझे मर जाने का,
अलम सिर्फ तेरे न आने का.
इतना फर्ज तो अदा कर देते,
देख लेते जनाजा दीवाने का.
ऐ शमा तू जलाने से पहले,
कसूर तो बता दे परवाने का.
इक ही नही काबिले इल्जाम,
दगा देना दस्तूर जमाने का.
"रैना" कह गया है अलविदा,
नाम लेकर किसी अनजाने का."रैना"

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

ab hme aur n

  अब न हमें और कुछ करना है,
  तेरी आँखों में डूब के मरना है.
आशिक की किस्मत में तन्हाई,
तन्हा बेदर्द जमाने से लड़ना है.

aadam bdla hai

बेशक शहर का न आलम बदला है,
बदला है तो सिर्फ  आदम बदला है.
निर्वाह करने के तरीके बदल गये,
ख़ुशी बदली न बेदर्द गम बदला है.
कुदरत का यारों वही अटल नियम,
मृत्यु बदली न ये जन्म बदला है.
"रैना" उसके दीवाने तो वही  खड़े,
मौकापरस्त लोगों ने करम बदला है."रैना"

बुधवार, 16 नवंबर 2011

ham vochirag hai


हम वो चिराग जो तूफान में जलते है,
अक्सर हवा के उलटे रुख ही चलते है.
हम सूरज चमकना हमारी फितरत,
मगर हम निकलते मर्जी से ढलते है.
महफ़िल का मिजाज है हमारे दम से,
बेशक पी के बहकते गिरते संभलते है.
भूल कर भी हमें बेदर्द न कहना यारों,
अरमां के बच्चे"रैना"के दिल में पलते है.

vo khfa uske ghar

वो खफा उसके घर जाये कैसे,
 अपने दिल को समझाये कैसे.
बाकी है अभी गुल के निशान,
तड़फ दिल की  मिटाये कैसे.
जल रही जो उल्फत की शमा,
अपने हाथों उसको बुझाये कैसे.
रुसवा कर दिया उसने हमको,
उसकी महफ़िल में  जाये कैसे.
दिल अपने पे भी यकीन नही है,
 सीने पे पत्थर भला उठाये कैसे.
अपनों ने तो दगा दिया हमको,
अपना किसी गैर को बनाये कैसे.
जो नीचें देख कर नही है चलता,
उसकी राह में पलकें बिछाये कैसे.
"रैना" उसको तो मना लेगा मगर,
रूठे नसीबा को फिर मनाये कैसे.
आजकल महिलाये
 देश को आगे बढ़ाने में काफी सहयोग दे रही है,
इसमें खास कर फ़िल्मी हीरोइने काफी दिलचस्पी ले रही है,
वो देश के गरीबों के लिए काफी कपड़ा बचाती है,
तभी तो कम कपड़े पहन कर जीवन बिताती है.
फिर भी लोग उन पर कटाक्ष करते है.

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

ik sandesh

एक संदेश दोस्तों के नाम,

बेशक खाली मकान छोड़ जा,
मगर
उसमें कोई अपना निशान छोड़ जा.
क्योकि
तू दुनिया में आया कुछ करके दिखाने के लिए,
अपनी अलग पहचान बनाने के लिए,
वैसे सदियों से लोग,
झोपड़ियों अथवा महलों में रहते आये है,
मगर बहुत कम लोगों ने इतिहास में नाम दर्ज करवाए है.
तू हादसों से मत डर,
इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिखवाने की कोशिश कर. "रैना"

taine ke bera

तैने के बेरा ओ क्योकर प्यार करें स,
शमा बावली जलें क्यों परवाने जलें स.
मुझसे खफा इस कदर मेरा नसीब है,
मुझको गम देने वाला  मेरा हबीब है, 
दारू शाला का
 लगता अंदाज निराला,
बेचैन दिल को चैन आये,
वी ऍम दे दो इक प्याला. "रैना"
बेशक पीने वाले यही कहते है,
हम दारू से दूर ही रहते है.
भला दिन में ही क्यों रात करते हो,
जिन्दगी अभी दो दिन बाकि है
फिर क्यों मरने की बात करते हो.
तू फूल है
महका दे सारा आलम,
 टूटने के कुछ देर बाद,
 पैरों में नजर आएगा."रैना"

thhokre khata khata

ठोकरे खाता खाता हो गया परेशान बहुत तंग मैं,
उम्र गुजार दी फिर भी न समझा दुनिया के रंग मैं.
दुःख दर्द सोचों से मेरी करदे बहुत दूरी,
हाथ जोड़ के अर्ज करू मांग कर दे पूरी.
मेरे हाथ में दूध की वो बोतल पकड़ा दे,
मालिक मुझे एक बार फिर बच्चा बना दे.
मालिक मुझे एक.................................
फिकर चिंता से दूर मैं हँसता,मारता किलकारी,
खिलती मेरी सूरत देख अम्मा जाये वारी वारी,
मीठी मीठी लोरी सुना के माँ की गोदी में सुला दे.
मालिक मुझे एक.................................
पा पा मा मा बोलना फिर मइया मेरी मुझे सिखाये,
हाथ पकड़ के चलाती कभी उठा के सीने से लगाये,
माँ के वक्षों से छलकता वो अमृत फिर मुझे पीला दे.
मालिक मुझे एक.................................
भींच सीने से मुझे लगा के  मेरी अम्मी रानी सोती,
मैं कर देता छू छू माँ मेरी जरा भी गुस्सा नही होती,
फिर आप सो जाती गीले पर और मुझे सूखे में सुला दे.
मालिक मुझे एक.................................
मैं हाथ जोड़ के करू गुजारिश मिन्नतें भी बार बार,
बस इक बार लौटा दे भगवन बचपन की वो बहार.
सब से अलग हसीन वो मंजर इक बार फिर दिखा दे.
मालिक मुझे एक...................................................."रैना"


jaldbaji n kar

तू जल्दबाजी छोड़ दे इत्मिनान रखा कर,
जिंदगी किसी की अमानत ध्यान रखा कर.
भीड़ में रह के जीना भला ये भी क्या जीना,
गली मोहल्ले में तू अलग पहचान रखा कर.
इस शहर में अब धोखेबाज फरेबी है बहुत,
बेहतर दिल की अक्सर बन्द दुकान रखा कर.
बस खाना पीना सोना शादी और ये बच्चे,
तू इससे अलग भी तो कोई अरमान रखा कर.
"रैना" तेरे दिल में चाहे लाखों गम है लेकिन,
अपने होठों पे तू हलकी सी मुस्कान रखा कर."रैना"

firag dil

मेरी रचनाओं की तारीफ करने वाले दोस्तों का,
 मैं तहदिल से आभार व्यक्त करता हु
अपने ऐसे दोस्तों की शान में एक शेर कह रहा हु.
 बेशक आप होगे फिराग दिल,
वैसे मेरे शहर के लोग किसी की तारीफ करने से गुरेज करते है. "रैना"

foolu ki tahar harpal

फूलों के मान्निद हरपल खिला करो,
जब भी मिलते हो हंस के मिला करो.
अच्छी न लगती तेरे माथे पे शिकन,
करना हो गिला तो हंस के गिला करो. "रैना"

शनिवार, 12 नवंबर 2011

gribi

बेशक गरीबी मेरे घर में रहती है मगर मैं उसे दिल के पास फटकने नही देता."रैना"

mere rkibo se

एक सूफी रचना आप सब के लिए मगर इस पे गौर फरमाने की जरूरत है.
मेरे रकीबों से तू निभाना नही,
कहा मैंने मगर तूने माना नही.
कहा मैंने मगर......................
किया वादा तेरे संग निभाऊ गी,
सइयां तेरे ही रंग में रंग जाऊ गी,
आई होश तूने मुझे पहचाना नही,
कहा मैंने मगर......................
मोह माया के झूले में झूल गई,
चढ़ा हुस्न का रंग सब भूल गई,
कौन अपना है तूने जाना नही.
कहा मैंने मगर......................
अब जमीं पे पैर तू रखती नही
कभी सइयां के दर फटकी नही,
याद तुझको अपना दीवाना नही.
कहा मैंने मगर......................
"रैना" मान ले अब खता तेरी,
वरना हो जाएगी बहुत ही देरी,
वहां भटके गा मिले ठिकाना नही.
कहा मैंने मगर...................... "रैना"
सुप्रभात जी ................good morning

tere bin jn kya

सुबह होती रफ्ता रफ्ता शाम ढलती है,
तेरे बिन जीना क्या सिर्फ साँस चलती है.
इक मुद्दत से मेरे दिल के घर में हैअँधेरा,
बेशक जवां महफ़िल शमा भी जलती है.
बेवफा मय जिसको को रिंद है बना देती,
वो जिंदगी बिन पीये न कभी संभलती है.
बेशक दिल तो होतो घर उस मालिक का,
मगर अब दिल के घर में नफरत पलती है."रैना"


chal rha kuchh daur

चल रहा कुछ ऐसा दौर, इन्सां भ्रम में रहता है,
बात का बुरा मान जाये, जब सच कोई कहता है.
झूठा बेवफा फरेबी अब तो आगे खड़ा नजर आये,
जिसे का बचा है दीन  इमान वो तो पीछे ही बैठा है. "रैना"

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

dil ke ghar me aag

बदनसीबी मेरी दिल के घर में आग लगी है,
सब कुछ जल गया मगर तेरी याद न जली है
बेवफा याद तेरी तुझसे तो कही भली निकली,
सुख दुःख में बनके परछाई मेरे साथ चली है.
दुःख नही कोई मगर यही मेरे गम का सबब,
खिलने से पहले ही मुरझा गई दिल की कली है.
"रैना"दिन तो कट जाता काम में मसरूफ रहके,
याद रह जाये फक्त मयखाना जब शाम ढली है. "रैना"

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

nsib me mere

हमें तुझसे न कोई गिला है,
नसीब में मेरे तू न लिखा है.
किसी को कोई कुछ न देता,
लिखा किस्मत में मिला है. "रैना"

kyo din me diye

क्यों दिन में दीये जला रहे हो,
क्या खुद को राह दिखा रहे हो.
जवां हो गये अरमानों के बच्चे,
क्यों तुम अब उन्हें मिटा रहे हो.
मुझे मरने दो ये मेरी किस्मत,
यूँ मुझ पे क्यों तरस खा रहे हो.
अभी अँधेरा है जलने दो चिराग,
क्यों बेसबब चिराग बुझा रहे हो.
"रैना" से जब तोड़ लिया रिश्ता,
फिर उसके ख्वाबों में आ रहे हो. "रैना"

बुधवार, 9 नवंबर 2011

vo n badla

वो न बदले चाँद सितारे,
देखो इन्सान बदले सारे,
बेशक वही समझे उसको,
जो है मर्जे इश्क के मारे.
दीवानी मस्त मीरा नाचे,
काना काना श्याम पुकारे.
अपने में खोज ले उसको,
क्यों रैना" भटके द्वारे द्वारे."रैना"
.

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

angur khatte hai

वैसे तोड़ने के लिए छलांगे लगा रहा हूँ,
मगर अंगूर खट्टे है मैं नही खा रहा हूँ.
मेहनत करना तो मेरी समझ से परे है,
मैं निरंतर ख्वाबों के महल बना रहा हूँ.
 छपर फाड़ के गिरेगा मेरे घर में सोना,
मैं इसी आस के दम से जीये जा रहा हूँ. 
समझ आई"रैना"ये मेरे मन का फितूर है,
मैं जीवन के हसीं पल बेवजह गवा रहा हूँ.

jpe ja man jai jai maa

जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ................
तू नाम की शक्ति जान.
तेरा हो जाये कल्याण.
जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ.................
ये सांसो की है सारी कहानी,
पल पल बीती जाये जिंदगानी,
जीवन के संग मौत खड़ी है,
मौज में भूला बैठा तू अज्ञानी, 
कुछ करले अपना ध्यान.
जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ................. "रैना"
सुप्रभात जी ..............good morning


agnivesh

बेशक
 खास व्यक्ति आग्निवेश,
इनके कर्म अलग विशेष,
ये जहाँ भी करते  प्रवेश,
वहां शुरू हो जाता कलेश,
भगवा वस्त्र पहनते हमेश,
मगर मन में रखते है द्वेष.
इनका एक ही मकसद शेष,
बस कुर्सी के लिए लगते रेश.
इनकी नीयत बुरी,
इसलिए बुरी घटना घट जाती,
कुर्सी इनके हाथ से निकल जाती."रैना" 

सोमवार, 7 नवंबर 2011

sari rat

सारी रात चिराग जलाये रखते है,
तेरे आने की आस लगाये रखते है.
नींद चली गई छोड़ के साथ मेरा,
हम तो आँखों को जगाये रखते है.
यूँ कभी तो आयेगे बहारों के दिन,
अपने दिल को समझाये रखते है. "रैना"

meri kismat me hai tanhai

किस्मत में तन्हाई,हम तन्हा है,
नसीबों में रुसवाई, हम तन्हा है,
बहरे इश्क में हमने पैर जब रखा,
दुश्मन बनी खुदाई, हम तन्हा है "रैना"

रविवार, 6 नवंबर 2011

aek chnti

एक चींटी 
जब दिल्ली का सदन घूम के आई,
खेमे में आकर उसने शुरू करदी लड़ाई,
वह टाँगें खीचनें एवं टाँगें अड़ाने लगी,
यह देख रानी चींटी घबराने लगी.
दूसरी चींटी ने बताया ?????????
वो चींटी इसलिए बौखलाई है,
क्योकि दिल्ली का सदन घूम के आई है.
रानी चींटी कहने लगी,
वैसे भी दिल्ली के सदन में जो इक बार जाता है,
वह कुर्सी के लिए बौखला ही जाता है."रैना"

kuae par

मस्तियाँ करती बेशुमार कुए पर,
भर रही है पानी जवां नार कुए पर.
हुस्न के जलवे है यूँ सुगंध महकती,
देखो आके ठहर गई है बहार कुए पर.
उठ जाती है कभी नजरें झुकी झुकी,
राम जाने किसका इंतजार कुए पर.
जब से उनके घरों में नलके लग गये,
आशिक खड़े मायूस लाचार कुए पर. 
पानी भरने की मस्त अदा तो देख लूँ,
"रैना" कहे आ जा तू इक बार कुए पर. "रैना"

dusre ka ghar

दुसरे का घर जल के तबाह हो जाये,
 फिर भी अफ़सोस नही होता,
मगर जब अपने घर आग लगती है तो,
 इन्सान सुबक सुबक रोता.................. "रैना"

mere armano kihasti

मेरे अरमानों की हस्ती मिटा रहे हो,
पास आ के अब क्यों दूर जा रहे हो.
मेरे महले दिल को खण्डहर बना के,
तुम अब किसी और को बहका रहे हो.
कन्धे पे रख अपनी लाश लिए घूमता,
श्मसान का न मुझे रास्ता बता रहे हो.
उसकी की तपिश तुझे लगेगी जरुर,
मेरे घर को जो तुम आग लगा रहे हो.
"रैना"की मोहब्बत का निशां रह जाये,
चाहे तुम साबुन से उसको छूटा रहे हो. "रैना"

शनिवार, 5 नवंबर 2011

hasn khedan da

ਹਸਣ ਖੇਡਣ ਦਾ ਨਆਂ ਹੈ ਜਿੰਦਗੀ,
ਪੜਨਾ ਲਿਖਣਾ ਕਰ ਲੈ ਬੰਦਗੀ,
ਉਮਰਾ ਦਾ ਰੋਗ ਨਹੀ ਲਾਈਦਾ,
ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ਪਾਈਦਾ 
ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ........
ਜਿੰਦਗੀ  ਦਾ ਹਸੀਂ ਦੌਰ ਜਵਾਨੀ,
ਵੇਖੀ ਕਿਤੇ ਹੋ ਨਾ ਜਾਵੇ ਨਾਦਾਨੀ, 
ਸੋਹਨੀ ਸ਼ੈ ਤੋ ਅਖੀਆਂ ਬਚਾਈ ਦਾ.
 ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ........... "ਰੈਨਾ"

maa ki yad

 माँ की प्यारी याद गांव खींच लाती है,
चंद लम्हें जिंदगी हसीन हो जाती है.
शहर की दूषित हवा ने बूढ़ा किया है,
गांव में जवानी तो फिर लौट आती है.
खेल के गुजरा है जहां प्यारा बचपन
वो कच्ची गलियां मुझे बहुत भाती है.
तब महसूस होता जन्नत का नजारा,
चूमे माँ मुख  भींच के गले से लगती है.
"रैना" का गांव है जन्नत से भी बढ़ कर,
माँ बाप के कदमों में जिंदगी महकाती है.

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

kash teri


काश तेरी नजरों से बचा रहता,
मेरा भी दीनों धर्म बना रहता.
हाले दुनिया से बेखबर न होता,
मुझे अपना भी कुछ पता रहता.
चढ़ जाती नाम की खुमारी मुझ पे,
मैं किसी अच्छे काम लगा रहता.
अब बदल गया रंग तेरी बस्ती का,
यहाँ छल कपट फरेब दगा रहता.
"रैना" काश ऐसा तो ही हो जाता,
दिल में तेरा अक्स तो सजा रहता. "रैना"

shikwa shikayat

तुझसे गिला करू कैसे सब कुछ तो हासिल है,
नजरे इनायत कर्म तेरा बंद हो गया काबिल है.
मेरे पास हरपल रहता बेशक नजर नही आये,
एहसास मुझे ये सच्चाई जिंदगी में तू शामिल है."रैना" 
सुप्रभात जी ..............................................good morning

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

gamgin kisa hai

अपना मेरे दोस्तों गमगीन किस्सा है,
फूलों ने निभाई नही काँटों से रिश्ता है.
गम में रह कर भी मुझे होता नही गम, 
तमाम मिले गम जिन्दगी का हिस्सा है."रैना"
.

sirf kafiya

सिर्फ काफिया रदीफ़ मिलाना ही नही मेरा मकसद,
मैं तो कुछ ऐसे शेर बनाना चाहता हूँ,
जिनके मार्फ़त हर दिल के करीब जाना चाहता हूँ,
आखिर शायरी किस कदर हंसा रुला सकती है,
जमाने को ये दिखाना चाहता हूँ."रैना"

rone se masle

रोने से मसले हल नही होते,
हिम्मत वाले तभी नही रोते.
जिनको मंजिल की तलब है,
चैन से वो तो कभी नही सोते.
जिनकी नीयत निति न कोई,
गम का बोझ तो वही है ढ़ोते.
लाजिमी वो ही तो पैदा होगा,
खेत में जो भी फसल है बोते.
"रैना" का तो जिगर फौलादी,
आंसुओं से न पलकें भिगोते.."   "रैना"

बुधवार, 2 नवंबर 2011

sawere sham

सुबह शाम दिन का नजारा उसी का है,
हम जो सांस ले रहे इशारा उसी का है.
हम जो सांस ले ...............................
हम जो देख रहे है झूठा वो सपना है,
और तो क्या जिस्म भी न अपना है,
अर्श चाँद सूरज हर सितारा उसी का है.
हम जो सांस ले .............................
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे चर्च में न बैठा है,
सचे नेक इन्सान के वो दिल में  रहता है,
जो इंसान का प्यारा वो प्यारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................
देख महल बंगले को तू फूला न समाये रे,
आईने को देख करके  बहुत ही इतराये रे,
"रैना" कुछ नही तेरा सब सारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................."रैना"


maine khud ko mita diya hai

मैंने खुद को मिटा दिया है,
समां पुराना जला दिया है.
गम की आग में जल के,
सोना खरा बना दिया है.
छोड़ मतलब की दुनिया,
उससे दिल लगा दिया है.
दिन निकला मैं सो रहा,
खुद को मैंने जगा दिया है.
"रैना" अब समझ में आई,
डूबने से उसने बचा दिया है."रैना"
 .

khfa ho kar

खफा हो कर मेरे घर से उजाले निकले,
हमदम मेरे दोस्त दिल के काले निकले.
जिन पे करते थे खुद से ज्यादा भरोसा,
वही तो आस्तीन में सांप पाले निकले.
मेरी आँखों ने खींची तेरी तस्वीर वैसी,
मगर तेरे अन्दाज कुछ निराले निकले.
"रैना" हम अपना सब कुछ लुटवा कर,
चुप तेरे कूंचे से खुद को संभाले निकले."रैना"

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

mushikal hai

दिल रोता मगर फरियाद करना मुशिकल है,
हुनरे फरेब में दक्ष जमाना बड़ा ही तंगदिल है.
"रैना" दिल के हाथों मजबूर देखो मेरी बेबसी, 
मैं उसे सजा नही दे सकता जो मेरा कातिल है."रैना"