तेरे बिना भी क्या जीना है,
जामे जहर का क्या पीना है.
उसका डूबना तो तय यारो,
माझी के बिन जो सफीना है.
इंसान खुद को परख न पाये,
अंजान कीमत से नगीना है.
दर्दे जुदाई भी हंस के सहता
रैना"का तो फौलादी सीना है."रैना"
जामे जहर का क्या पीना है.
उसका डूबना तो तय यारो,
माझी के बिन जो सफीना है.
इंसान खुद को परख न पाये,
अंजान कीमत से नगीना है.
दर्दे जुदाई भी हंस के सहता
रैना"का तो फौलादी सीना है."रैना"
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