भारत देश में चूल्हा जलाता कोई और है,
खीर पकाता साधू राम खाता कोई और है.
कहने को शरीफ बस्ती बदमाशों का पहरा,
साहूकार अब क्या करे पहरेदार ही चोर है.
चोर उच्चको नेताओं की यहां मौज बहार,
मुशिकलों की चक्की में पिसता कमजोर है.
पैसे की अंधी दौड़ में सभी अन्धे है हो गये,
दीन धर्म लाज शर्म की किसी को न गौर है.
बदलते इस जमाने में पशु बहुत कम हो गये,
ऐसा तो होना था क्योकि इंसान बना ढोर है.
बेशक इबादत बंदगी शांतप्रिय माहौल में,
मगर अब बंदगी नाच गाना मचा हुआ शोर है.
"रैना" आज के इन्सान की बेबसी तो देखिये,
मंजिल कही और मगर जा रहा कही और है."रैना"
खीर पकाता साधू राम खाता कोई और है.
कहने को शरीफ बस्ती बदमाशों का पहरा,
साहूकार अब क्या करे पहरेदार ही चोर है.
चोर उच्चको नेताओं की यहां मौज बहार,
मुशिकलों की चक्की में पिसता कमजोर है.
पैसे की अंधी दौड़ में सभी अन्धे है हो गये,
दीन धर्म लाज शर्म की किसी को न गौर है.
बदलते इस जमाने में पशु बहुत कम हो गये,
ऐसा तो होना था क्योकि इंसान बना ढोर है.
बेशक इबादत बंदगी शांतप्रिय माहौल में,
मगर अब बंदगी नाच गाना मचा हुआ शोर है.
"रैना" आज के इन्सान की बेबसी तो देखिये,
मंजिल कही और मगर जा रहा कही और है."रैना"
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