माँ ने कहा किसी का दिल दुखाना नही,
बात हजम करना किसी को बताना नही.
गर जो आ जाये बात करने का सलीका,
फिर सारा शहर अपना कोई बेगाना नही,
जो उसने बख्शा मिल बाँट सबर से खाना,
घर के आँगन में दीवार कभी उठाना नही,
हासिल सब कुछ मेहनत मुकद्दर से होगा,
हंसता देख के किसी को दिल जलाना नही.
मोहब्बत में जां चली जाये प्रवाह न करना,
मगर जालिम के सामने सिर झुकाना नही.
बेशक घर में ही रहते भगवान माँ बाप तेरे,
इबादत कर इनकी चाहे तू तीर्थ नहाना नही.
"रैना"ख्याल रखना खुद में सिमट कर रहना,
अहम न करना बेवजह खुद को दिखाना नही."रैना"
बात हजम करना किसी को बताना नही.
गर जो आ जाये बात करने का सलीका,
फिर सारा शहर अपना कोई बेगाना नही,
जो उसने बख्शा मिल बाँट सबर से खाना,
घर के आँगन में दीवार कभी उठाना नही,
हासिल सब कुछ मेहनत मुकद्दर से होगा,
हंसता देख के किसी को दिल जलाना नही.
मोहब्बत में जां चली जाये प्रवाह न करना,
मगर जालिम के सामने सिर झुकाना नही.
बेशक घर में ही रहते भगवान माँ बाप तेरे,
इबादत कर इनकी चाहे तू तीर्थ नहाना नही.
"रैना"ख्याल रखना खुद में सिमट कर रहना,
अहम न करना बेवजह खुद को दिखाना नही."रैना"
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