सोमवार, 2 जनवरी 2012


मेरे क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ है,इस सडक हादसे में एक स्कूल
 के लगभग एक दर्जन बच्चे मोत का शिकार हुए है.
उस हादसे से दुखी हो कर ये रचना लिख रहा हूँ.

इक ही हादसे ने कई घर उझाड़े हैं,
टूट के जमीं से अर्श को गये तारे हैं.
रो रो के बुरा हाल सुध बुध खो बैठे,
बिछुड़ गये जिनके जान से प्यारे हैं.
जिगर का टुकड़ा माँ ने भेजा स्कूल में,
अफ़सोस घर लौट के न आये नजारें हैं.
रैना" उससे शिकायत भला कैसे करे कोई,
होनी ने तो अक्सर ऐसे कहर गुजारे है."रैना"

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