रे बन्दे कुछ सोच तू कर,
फिरता है तू फूला फूला,
वादे कसमे सब तू भुला,
उस मालिक से तो डर,
ओ बन्दे कुछ सोच तो कर.रे बन्दे ................
तन की तुझे हरपल चिंता,नहाये मल के रूप सजाये है,
रूह की कोई भी फिकर नही,तू बिरथा जन्म गवाये है,
तेरा तन भी धोखा दे जायेगा,आखिरी वकत आने पर.
ओ बन्दे कुछ सोच तो कर.रे बन्दे ................
सुप्रभात जी ..............................good morning ji
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें