सोमवार, 23 जनवरी 2012

apne desh ke netao

अपने देश के नेताओं का न दीन इमान रहा,
कैसे पैसे इकठ्ठे करने इतना ही ध्यान रहा.
चोर उच्चको की मौजे राजनीति के हथियार, 
मेहनत मशक्त करे जो भद्र जन परेशान रहा.
बैठे स्वर्ग में शहीद अब खुद को ही  कोस रहे,
इनसे अंग्रेज अच्छे व्यर्थ हमारा बलिदान रहा.
जन लोकपाल जो बने इन्हें जेल जाना होगा,
अपने पर कटते देख नेता वर्ग भौहे तान रहा.
आजादी की दूसरी लड़ाई हरहाल जीतनी है,
बेशक"रैना"का अब ये आखिरी अरमान रहा."रैना"

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