अच्छा होगा कुछ नया करने लगे,
साथ किताबों के खुद को पढ़ने लगे.
बहुत लड़े है बेवजह इस जमाने से,
हासिल होगा जो खुद से लड़ने लगे..
समझदार भी नासमझ हुये शहरी,
ढोंगियों के ही हम पैर पकड़ने लगे.
अब नसीहत का भी न होता असर,
लोग मर्जी की राह पे है चलने लगे.
"रैना"नीयत नेक राह को छोड़ के,
हम खुद को ही क्यों छलने लगे है."रैना"
सुप्रभात जी..............good morning
साथ किताबों के खुद को पढ़ने लगे.
बहुत लड़े है बेवजह इस जमाने से,
हासिल होगा जो खुद से लड़ने लगे..
समझदार भी नासमझ हुये शहरी,
ढोंगियों के ही हम पैर पकड़ने लगे.
अब नसीहत का भी न होता असर,
लोग मर्जी की राह पे है चलने लगे.
"रैना"नीयत नेक राह को छोड़ के,
हम खुद को ही क्यों छलने लगे है."रैना"
सुप्रभात जी..............good morning
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें