sufi tadka
रविवार, 29 जनवरी 2012
ishak ka jikar
इश्क का जिक्र आसां मगर इश्क करना मुशिकल है,
इश्क मुकम्मल तब होता जब आशिक होता पागल है.
बदले जमाने का रंग देख कर आशिक भी बदल गये,
मतलबखोरों की बस्ती हर कोई साजिश में शामिल है "रैना".
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