हम क्या बताये कैसे जिन्दगी बिता रहे है,
कंधे पे लाश अरमानों के जनाजे में जा रहे है,
उम्मीद थी आखिरी वक्त चार आ ही जाये गे,
मगर अफ़सोस अपना भार खुद ही उठा रहे है."रैना"
कंधे पे लाश अरमानों के जनाजे में जा रहे है,
उम्मीद थी आखिरी वक्त चार आ ही जाये गे,
मगर अफ़सोस अपना भार खुद ही उठा रहे है."रैना"
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