सर जी आप ने जो किस्सा सुनाया था कुछ इस तरह लिख रहू क्या ठीक है,
जिस्म था टुकड़े टुकड़े करेया
धर्मं प्रेमी हंस हंस कै मरेया,
देश धर्म कै खातिर मरना होवे ठाट का,
यो किस्सा स धर्मी वीर गोकल जाट का.
रै रै यो किस्सा स..........................
जिस्म था टुकड़े टुकड़े करेया
धर्मं प्रेमी हंस हंस कै मरेया,
देश धर्म कै खातिर मरना होवे ठाट का,
यो किस्सा स धर्मी वीर गोकल जाट का.
रै रै यो किस्सा स..........................
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें