शुक्रवार, 2 मार्च 2012

kana khelo mah sang

होली का रंग चढ़े ऐसा,
फिर ये उतरे न उम्र सारी,
कर ली है साजन हमने तो,
इस  बारी ऐसी तैयारी.
राधा कृष्ण जी से होली खेलने के लिए कुछ ऐसे कह रही है.
काना खेलो मोह संग होली,
दूर दूर न जाऊ मोह से,
मैं तो तेरी हो ली.
काना खेलो ...................
होली के दिन वैसे मची हुई लूट है,
और को पाबंधी पर तेरे लिए छूट है,
चाहे भिगो अंगिया मोरा,
चाहे भिगो ले चोली.
काना खेलो ...................
वैसे तो मुझ पे रंग तेरा चढ़ा है,
पर लाल पीले रंग में मजा ही बड़ा है,
प्रेम का रंग हम इसमें घोले,
बन जाये रंगोली.
काना खेलो ..................."रैना"
सुप्रभात जी ..........good morning ji

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