गुरुवार, 1 मार्च 2012

ye kya ho rha hai bhai

ये क्या हो रहा भाई ये क्या हो रहा है,
आम आदमी खून के आंसू रो रहा है,
अब बेशर्मी सारी हदें है पार कर गई,
जनता का मसीहा बैठा सदन में सो रहा है.
ये क्या हो रहा...............................
चोर उच्चकों की हो रही जय जयकार है,
भ्रष्टाचार अब तो बन गया व्यापार है,
नोट पे बैठा महात्मा गाँधी आँखें भिगो रहा है.
ये क्या हो रहा............................................
नेता को जनता का न कोई भी  ध्यान है,
अपने बोस नेता का बस करता गुणगान है,
आम जन तो महंगाई का भार ढो रहा है 
ये क्या हो रहा......................................
देश की राजनीति की कोई न नीति है,
नेता को अब सिर्फ माया से प्रीति है,
पैसे का दीवाना अपना होशो हवास खो रहा है.
ये क्या हो रहा..............................."रैना"

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