जो भी ज्ञानी ध्यानी है,
वो ही पंडित कहलाता,
पंडित पहले खुद समझे,
फिर औरों को समझाता,
यहाँ की सवारे निरन्तर,
वहां की राह है बनाता,
मन से साफ शुद्द पवित्र,
उसके गुण हरपल गाता,
जाति धर्म की बात नही,
पंडित कोई भी बन जाता.
मगर वो इसका हक़दार नही,
जिसने मास मदिरा से नाता............"रैना"
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