खो दिया मैंने जो भी है पाया,
भूला मकसद फूल मुरझाया.
मेरी खता जो मैं नही समझा,
वैसे तो उसने मुझे समझाया.
बेशक मुझको नजर न आता,
एहसास होता वो मेरा हमसाया.
दिन में जिसने रात को न सोचा,
शाम ढलते वो बहुत पछताया.
हिसाब कर्मो का तो देना होगा,
भगवान कृष्ण ने सही फ़रमाया.............."रैना"
भूला मकसद फूल मुरझाया.
मेरी खता जो मैं नही समझा,
वैसे तो उसने मुझे समझाया.
बेशक मुझको नजर न आता,
एहसास होता वो मेरा हमसाया.
दिन में जिसने रात को न सोचा,
शाम ढलते वो बहुत पछताया.
हिसाब कर्मो का तो देना होगा,
भगवान कृष्ण ने सही फ़रमाया.............."रैना"
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