बुधवार, 31 जुलाई 2013

chhodo gali gloch

दोस्तों स्टाफ सैलेक्शन कमिशन हरियाणा के सदस्य
 ए के जैन अम्बाला
 द्वारा शुरू किये गये गाली छोडो अभियान का हिस्सा बने
इस अभियान को समर्पित ये गीत


छोड़ो गाली गलोच,
बदलो अपनी सोच,
पढ़ लिख कर गुणवान हुये,
कहने को हम बुद्दिमान हुये,
कड़वा है सच बेशक ये ही बात आम है,
गाली हमारा अब तो तकिया कलाम है।
गाली हमारा ………………
करते गर्व हम सब अपनी झूठी शान पर,
मां बहन की गाली रहती हमारी जुबान पर,
माहौल बन गया ऐसा न किसी पे इल्जाम है।
गाली हमारा ,.....................
"रैना" का कहना अब तो गाली देना छोड़िये,
प्यार से बोल के कानों में मिश्री सी घोलिये,
लड़ाई झगड़े नफरत गाली का ही परिणाम है।राजेन्द्र "रैना"   

रविवार, 28 जुलाई 2013

jine ki tmnna

जीने की तमन्ना नही मरने की सोचने लगे हैं,
अफ़सोस है यही ये कुत्ते फिर से भोकने लगे हैं।
क्या करे गा जा कर वहां आराम बिलकुल नही,
कुछ तो ये कह कर भी रास्ता मेरा रोकने लगे हैं।
जब से उन्होंने सुनी मेरी तैयारी की खबर यारो,
अब वो मेरे बारे में कुछ अच्छा ही सोचने लगे हैं।
जिन्दगी जीने में अब तो लुत्फ़ सा आने लगा है,
जब से मुझे वो अपना समझ कर टोकने लगे हैं।
गुमनाम" जब से उसने शुरू कर दी  तारीफ मेरी,
तब से तो हम भी जम के आईना देखने लगे हैं। राजेन्द्र 'गुमनाम" 
     

शनिवार, 27 जुलाई 2013

wah mere desh ke neta

एक व्यंग्य कविता,

वाह मेरे देश के नेता,
अपने कुत्ते पर हर रोज??????
500 रूपये खर्च कर जाते है,
और गरीब जनता को?????
पांच रूपये में खाना खिलाते हैं।
नेता हाव भाव ऐसे दिखाते हैं,
जैसे वो नर्क लोक में होटल चलाते हैं,
क्योकि धरती लोक में ऐसा कुछ????
नजर नही आता जहां गरीब का मन खिलता हो,
और पेट भर खाना एक,पांच,12 रूपये में मिलता हो।
अब लगता हैं ये नेता कुछ नया करके दिखाये गे,
गरीबी मिटाने के लिये गरीबों को जड़ से मिटाये गे। राजेन्द्र "गुमनाम"

सोमवार, 22 जुलाई 2013

दोस्तों ये ग़ज़ल आप के नाम

दोस्ती तुझ से रखना चाहते है,
तुम हसीं हो हम हंसना चाहते है।
हादसें इस नगरी में हो रहे हैं,
हादसों से हम बचना चाहते है।
इश्क का जयिका तो अच्छा नही है,
स्वाद फिर भी ये चखना चाहते है।
घर बने कैसे महंगाई बहुत है,
तेरे दिल में हम बसना चाहते है।

हो लिखा जिसमे जीने का तरीका,
हम किताबे वो पढ़ना चाहते है।राजेन्द्र "गुमनाम"


शनिवार, 20 जुलाई 2013

anna tu bhi chup gya ganna

गुस्ताखी माफ़ कोई दिल को मत लगाना
सिर्फ हंसने के लिए व्यंग्य

अन्ना तू भी ???
चूस गया गन्ना,
बिना दंत के,
लगता है सी बी आई से ????
डर रहा है,
तभी तो बयान?????
बदली कर रहा है,
खैर???
भारत में जो भी नेता बन जाता है,
गिरगट की तरह रंग बदल जाता है।राजेन्द्र "गुमनाम"

शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

jindgi me ab najara

मेरी किताब की इक रचना
 दोस्तों की महफ़िल में

जिंदगी में अब नजारा न रहा,
जो हमारा था हमारा न रहा।
हाथ पकड़े गा न कोई ये चिंता,
वो सहारा अब सहारा न रहा।
बन्दगी करने की हसरत थी मिरी,
देवता मेरा पियारा न रहा।
तरस खाये तो भला क्यों ये बता,
आदमी अब तो बेचारा न रहा।
झूठ सिर चढ़ बोलता है अब यहां,
सच उगलता अब वो नारा न रहा।
सिरफ़"रैना को हैअफ़सोस यही,
ख्वाब में अब वो सितारा न रहा।राजेन्द्र "रैना"

मेरे युवक दोस्तों के लिए

जो हिम्मत से दोस्ती होगी,
फिर तो हर तरफ रौशनी होगी।
तू  उठ कर चलता क्यों नही,
मंजिल तेरा रास्ता देखती होगी।"राजेन्द्र "गुमनाम"

रविवार, 14 जुलाई 2013

marna marna kyo ab karna

संडे स्पेशल दोस्तों के लिए खास

मरना मरना क्यों अब करना,
जीने की बस बात करे,
जहां भी जाये जिस महफ़िल में,
खुशियों की बरसात करे।
 जहां भी जाये ............................
चार दिन की है जिंदगानी,
न जाने कब खत्म कहानी,
 आँखों में मत लाना पानी,
अफ़सोस क्यों जब चीज बेगानी,
टूटे बिखरे धागें जोड़े,
हंस हंस के मुलाकात करे।
जहां भी जाये ..........................
मिठ्ठे मिठ्ठे बोल हम बोले,
यूं कानों में मिश्री सी घोले,
मन के बाद दरवाजे  खोले,
अपने तराजू में सच तोले,
गुमनाम"मशहूर जो जाये,
जो नेक अपने ख्यालात करे।
जहां भी जाये .......................राजेन्द्र "गुमनाम"







शनिवार, 13 जुलाई 2013

char kandhon pe

दोस्तों सच्चाई पर आधरित ये गीत

चार कन्धों पे हो के सवार,चले गे जब यार,
कुछ तो रोये गे,
जिनसे रहती मेरी तकरार,जो खाते मुझसे खार,
वो तो खुश होये गे।
हां कुछ तो रोये .............
कुछ तो कहे गे बड़ा ही सयाना था,
और कुछ कहे गे अंधों में काना था,
कुछ कहे गे होनहार खिलाड़ी था,
और कुछ कहेगे कोड़ की बीमारी था,
कुछ कहे भगवन गिन गिन बदले लेना,
कुछ कहे गे इस की रूह को शांति देना,
कोई कुछ भी कहे,
हम तो चैन से सोये गे,
हां कुछ तो ....................................
बच्चें कहे गे बाप ने कुछ न छोड़ा है,
बीवी कहे गी इसने खून ही निचौड़ा है,
पडौसी कहे गे पैसे मेरे भी खा  गया,
दोस्त कहे गे चूना हमें भी लगा गया,
इस दुनिया का गुमनाम " ये दस्तूर है,
उसको भूल जाते जो चला जाता दूर है,
जिस से है मतलब,
कपड़े उसके ही धोये गे।
हां कुछ तो .......................राजेन्द्र "गुमनाम"

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

mainekhud ko krib se

मैने खुद को करीब से नही देखा,
जमाना देखने की बात करता हूं,
जो मेरा अपना उससे प्यार नही,
सिर्फ दिखावा करु उससे डरता हूं।
आवाजें आती रहती हैं पत्थरों से,
मैं सुन कर भी अनसुनी कर देता,
बेवजह के कामों में उलझा हरदम,
सजायाफ्ता मैं जुर्माना भरता हूं।
मोह माया की बीमारी लगी मुझको,
खबर है फिर भी इलाज नही करता,
"रैना" को इंतजार उस सुबह का है,
इसलिये तो बेहिसाब गम जरता हूं।राजेन्द्र "रैना"
सुप्रभात जी ................जय जय

tute pttoki

दोस्तों के लिए खास

टूटे पत्तों के मान्निद बिखर जायेगे,
ये तो खुदा जाने फिर किधर जायेगे।
इतने हसीन जलवें हरगिज न होगे,
होगा गुप अन्धेरा हम जिधर जायेगे।
सोचने से बेहतर कर्म ही किया जाये,
फिर तो निश्चत है उसके घर जाये गे।
सच की राह पे"रैना"जो भी चलते हैं,
बेशक उन के तो जन्म संवर जाये गे।राजेन्द्र "रैना"

गुरुवार, 11 जुलाई 2013

pas rhake bhi dur

इस जिन्दगी की है यही दास्ता,
मेरा तुझसे तेरा मुझसे वास्ता।
मैं परेशान तुझ को ही ढूंढ़ रहा,
तेरे घर आने को कोन सा रास्ता।राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी ................जय जय मां 

wah ri sarkar

वाह री सरकार?????
गरीबों को सस्ता अनाज दिया है,
मध्यवर्गीय के
भूखे मरने का इंतजाम किया है।राजेन्द्र "गुमनाम"

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

maa ki yaad

मां की याद तो जरुर आये गी,
क्योकि उसी का खून तो रगों में दौड़ता है।राजेन्द्र गुमनाम"

सोमवार, 8 जुलाई 2013

prda nshi

पर्दानशी ओ पर्दानशी,
हटा पर्दा दिखा जलवा,


गुलामों के शहर में सिर्फ चंमचों की कद्र होती है,
अब आम जिन्दगी तो बस चौराहे पे खड़ी रोती है,
देखो मंहगाई ने अब तो जीना हराम कर दिया है,
शराबी की बीवी चार बच्चों की मां भूखी सोती है।"राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी .......................जय जय मां 

रविवार, 7 जुलाई 2013

kar le sajn se bat

सूफी गीत

कर ले सजन से बात,
वर्ना हो जाये जब रात,
बहुत पछताये गी,
कोई सुन गा तेरी पुकार,
रोये गी चिल्लाये गी।
रोये गी ...................
दिन को देख तू काये इतराये,
पल पल दिन ये ढलता जाये,
मिट्टी का साथ मिटटी के संग है,
इक दिन मिट्टी मिट्टी में मिल जाये,
जब जीती बाजी जाये हार,
रूह भी घबराये गी।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...................जय जय मां

शनिवार, 6 जुलाई 2013

brhte kadmom

सन्डे स्पैशल आप के लिए

बढ़ते कदमों को रोकना जरुरी है,
किसलिये आये सोचना जरुरी है।
ख्वाहिशों की उड़ान कम कर ले,
देखो खुद को भी टोकना जरुरी है।
आजकल के बच्चें कब सुनते हैं,
फिर क्या बेवजह भौंकना जरुरी है।
दोस्त भी बेवफा निकल जाते हैं,
दोस्ती से पहले परखना जरुरी है।
तेरे सीने में तो धड़के उसका दिल,
उसके सीने में तू धड़कना जरुरी है।
गुमनाम"की गुजारिश पे गौर कर,
चिलमन हटा तुझे देखना जरुरी है।राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी ............जय जय मां 

गुरुवार, 4 जुलाई 2013

dil me drd

 दिल में दर्द होने लगा,
सावन अभी आया नही।
नैना मिरे छम छम बरसे
बादल अभी छाया नही। राजेन्द्र "गुमनाम"

dopahar krari dhup me

दोपहर करारी धूप में शाम का जिकर,
करते हैं वो लोग जिन्हें रात की फ़िकर।
क्यों करता मेरी मेरी तेरा कुछ भी नही,
उसका ही सब कुछ है तू देख ले जिधर।
अपने दिल को लगा ले तू उसके रास्ते,
वर्ना जिन्दगी की बड़ी मुश्किल है डगर।
हाथ जोड़ सब से कर राम दुआ सलाम,
करता जो किसी की उसकी होती कदर।
वो देख रहा है ऐब तेरे गुनाह तमाम जो,
हरपल हर घड़ी उसकी तुझ पे है नज़र।
 गुमनाम"तू भी जी ऐसे औरों के वास्ते,
सीना ताने खड़ा सेवा में जैसे बूढ़ा शजर।राजेन्द्र "गुमनाम"
शजर =पेड़
सुप्रभात जी ................जय जय मां  

usko bhi mere

   उसको भी मेरे फटे हाल पे तरस नही आता,
   मैंने हजारों घिसा दी कलमें लिखते लिखते।"राजेन्द्र गुमनाम।

teri sirdi

साईं बाबा की शान में लिखे भजन की चंद लाइन

ओ तेरी सिरडी का भक्तों सिरडी का अजब नजारा है,
लगता साईं ने जन्नत को धरती पे खुद ही उतारा है।
तेरी सिरडी का ...................................
सारी दुनिया के वासी साईं बाबा के दर्श को आते हैं,
देव देवा भी इस दर पे आ कर के शीश झुकाते है,
मेरे बाबा का अन्दाज देखो सबसे अलग न्यारा है।
तेरी सिरडी का ....................................राजेन्द्र गुमनाम"

बुधवार, 3 जुलाई 2013

teri aankhon me

दोस्तों प्यारी सी रचना आप के हवाले

तेरी आँखों में डूब के मर जाये तो अच्छा,
ये जिंदगानी नाम तेरे कर जाये तो अच्छा।
दिल के जख्मों में दर्द होता रहता है रात भर,
मौत की मरहम से जख्म भर जाये तो अच्छा।
आतिशे इश्क ने जला दिये आशिक तमाम,
बेमौत मरने वाले गर यूं डर जाये तो अच्छा।
धर्म करने गये मगर फिर भी क़यामत आ गई,
भटके हुये वो मुसाफिर घर जाये तो अच्छा।
लाख चौरासी के चक्कर में फिर भटकेगा यही,
"गुमनाम" भव सागर से तर जाये तो अच्छा।राजेन्द्र "गुमनाम"
आतिशे इश्क =इश्क की आग 

मंगलवार, 2 जुलाई 2013

uthha lo bsta

उठा लो बस्ता चलते उस स्कूल में,
देश भक्ति की पढ़ाई होती है जहां,
विदेशों में तो ऐसे स्कूल तमाम हैं,
भारत में बताओ ऐसा स्कूल है कहां।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी .............जय जय मां 

sikhi hai tune kaha se

दोस्तों आप का मन बहलाने के एक गीत आप के नाम

ये बता सीखी कहां से यूं दिल चुराने की अदा,
तीरे नजर से वार कर बिजली गिराने की अदा।
ये बता सीखी .......................................
झुकी झुकी नजरें तेरी महका महका शबाब है,
हुस्न के जलवे हसीन देख दिल हुआ बेताब है,
 जान की दुश्मन बनी तेरी मुस्कराने की अदा।
ये बता सीखी .......................................
फैशन के इस दौर में है लाजवाब तेरी सादगी,
तू तो अनजान मगर गुमनाम करे तेरी बंदगी,
इक बार तू दिखा मुझको गले लगाने की अदा।
ये बता सीखी ...................................राजेन्द्र "गुमनाम"

ab mai aur kya kah skta hu

अब मैं और क्या कह सकता हूं,
कुत्ते भोंकने लगे स्टेज पे चढ़ कर।राजेन्द्र "गुमनाम"

log smjht

लोग समझते नही मिजाज मेरा,
वैसे मैं हर इन्सान में भगवान देखता हूं।राजेन्द्र "गुमनाम"

he yuwa

दोस्तों मेरी आप सब से हाथ जोड़ कर
विनती है ये कविता जरुर पढ़े

हे युवा हो खड़ा,
वक्त है नाजुक बड़ा,
नीम पर करेला चढ़ा,
हो गया कड़वा बड़ा।
तू बता किस से डरा,
घर तू सोया पड़ा,
मां तुझे पुकारती,
रस्ता तेरा निहारती।
हो गये हमले बड़े,
दुश्मन तलवार लिए खड़े।
मसीहा बेईमान हैं,
खोले बैठे दुकान हैं,
देश की चिंता न फिकर हैं,
बस अपना ही जिकर हैं।
सिर्फ लाइनें हैं खींचते,
अपना पेट ही पीटते।
चम्मचागिरी अब आम हैं,
इसी में उलझे तमाम हैं।
नीयत में सबकी खोट है,
मतलब सबका नोट है।
बस काम इतना कर रहे,
विदेशी बैंक हैं भर रहे।
युवाओं इतना काम करो,
गद्दारों का इंतजाम करो।
वरना वो दिन फिर आये गा,
मेरा देश गुलाम हो जाये गा।
ये अर्ज करता गुमनाम है,
अब होने वाली शाम है। राजेन्द्र "गुमनाम"


tujhse mohbbt kar

दोस्तों की नजर इक ग़ज़ल

हम मोहब्बत कर ले कैसे,
टूटे दिल शीशे के जैसे।
दुःख पीड़ा गम आहे नाले,
उल्फत के रस्ते हैं ऐसे।
अब दुनिया तो मतलब की है,
उससे रिश्ता जिस पे पैसे।
अच्छे कर्मों का फल मिलता,
मिल जाते जैसे को तैसे।
गुमनामी से कुछ नही हासिल,
घर चल दिये जैसे थे वैसे "राजेन्द्र गुमनाम"



vaise bujhdilo ki jmat me

 वैसे बुझदिलों की बस्ती में?????
  दिलदारों की इज्जत होती है।गुमनाम"

सोमवार, 1 जुलाई 2013

kya khak aesi

 क्या खाक ऐसी अमीरी जब मन रूष्ट है,
 निसंदेह धनवान है वही जो  सन्तुष्ट है।
 नीयत है जिसकी साफ वो धरमात्मा,
 जिसकी नारी पे बुरी नजर वो तो दुष्ट है।
 नशे से बराबर दूरी रखता जो नौजवान,
 मस्कुलर बदन उसका रहता हृष्ट पुष्ट है।
 गुमनाम"अब तू नसीहतें देना छोड़ दे,
आज इन्सान तो पहले से काफी चुस्त है। राजेन्द्र "गुमनाम"