sufi tadka
मंगलवार, 13 सितंबर 2016
ईद का जश्न हमने भी मना लिया होता,
तुम जो रूबरू होते सीने लगा लिया होता। रैना"
1222 1222 1222 1222
खफा होना नही हमसे मिरा तू ही सहारा है,
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