sufi tadka
शनिवार, 17 सितंबर 2016
नसीबा है खफा मुझसे
गुमां करना नही अच्छा चढ़ी महकी जवानी का,
बुरा फिर अन्त होता है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें