शनिवार, 17 सितंबर 2016

वाह अपना ही ख्याल लिखते है,
दनकौरी जी बाकमाल लिखते है। रैना"

 अब मुझे ख्वाब आते  नही है,
नींद आती नही ख्वाब  कैसे। रैना"

भटकते तो सभी हैं मंजिल के लिये,
लेकिन मंजिल मिलती है नसीब से। रैना"


जब माँ का सहारा मिल जाये,
हर हाल किनारा मिल जाये,
माँ "रैना"भी तेरा दीवाना है,
अब उसे भी नजारा मिल जाये। रैना"

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