शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

दोस्तों की महफ़िल में 
व्हाट्सएप्प पर मेरी आवाज में
94160 76914 

सच की गोली हजम न होती,
झूठ का चिंगम चबा रहे लोग,
गूंगे बहरे कुछ भी न बोले,
सिर्फ गर्दन हिला रहे लोग। 
महंगाई से तो बहुत दुखी हैं,,
बेबसी में वक्त बिता रहे लोग।
क्या खूब चल रही नूरा कुश्ती,
उठा खुद को ही गिरा रहे लोग। 
हंसता देख किसी को जलते,
अपने दिल को जला रहे लोग।
प्यासे माँ बाप पानी को तरसे,
वैसे सत्संग में जा रहे लोग। 
चम्मचा गिरी आसान रस्ता,
अब इसे ही अपना रहे लोग। 
जिसके हाथ में लाठी मोटी,
उसके पीछे ही जा रहे  लोग। 
नेता बदलेगा इस उम्मीद से, 
फिर वोट डालने जा रहे लोग। "रैना"

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