sufi tadka
बुधवार, 14 सितंबर 2016
खता उसकी नही कोई कमी मेरी रही होगी,
नसीबा लिख नही पाया कलम गुम हो गई होगी। रैना"
फेल हम हो गये इम्तहाने जिन्दगी में,
काश बोर्ड की परीक्षा होती???????///
पैसे देकर पास हो जाते। रैना"
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