दोस्तों ग़ज़ल पढ़े और सीखे
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मन के बंद दरवाजें खोले,
जब भी बोले हंस के बोले।
टीकाटिपणी करनी हो तो,
पहले परखे खुद को तोले।
तन मन को रंगना ही होगा,
चाहे जिसके पीछे हो ले।
तेरी बस्ती में सब उल्टा,
अच्छा होगा अब हम सो ले।
चिन्ता कल की कर ले रैना"
मस्ती में हरगिज मत डोले। रैना"
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मन के बंद दरवाजें खोले,
जब भी बोले हंस के बोले।
टीकाटिपणी करनी हो तो,
पहले परखे खुद को तोले।
तन मन को रंगना ही होगा,
चाहे जिसके पीछे हो ले।
तेरी बस्ती में सब उल्टा,
अच्छा होगा अब हम सो ले।
चिन्ता कल की कर ले रैना"
मस्ती में हरगिज मत डोले। रैना"
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