शुक्रवार, 30 सितंबर 2016


दोस्तों खास ग़ज़ल आप के लिए

याद तेरी  ने हमें रुलाया बहुत है,
तू बता क्यों आज याद आया बहुत है।
राख का इक ढेर सा हुआ दिल ये मेरा,
क्योकि हमने दिल भला जलाया बहुत है।
सर्द मौसम है बना मेरी जां का दुश्मन,
रात काली ने हमें डराया बहुत है।
अब छटी का दूध याद करवा दो इसको,
इस पड़ौसी ने हमें छकाया बहुत है।
चैन मिलता ही नही उसे भी उम्रभर,
बुजुर्गों को जिसने भी सताया बहुत है।
याद तेरी जब कभी परेशान करती,
तू न भूला हमने तो भुलाया बहुत है।
काश रैना"को समझ सके यार उसका,
दर्द उसको हमने तो सुनाया बहुत है। रैना"

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