सोमवार, 12 सितंबर 2016

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जख्म दिल पे लगे कितने दिखाना है बड़ा मुश्किल,
चेहरे का गिला वाजिव छुपाना है बड़ा मुश्किल।
अब शहर की फिजा बदली वफ़ा से दूर ही रहते,
गैर अब हो गये अपने बनाना है बड़ा मुश्किल।
पास रहता खफ़ा सा क्यों समझ कुछ भी नही आता,
उस हसीं ख़ास दिलबर को मनाना है बड़ा मुश्किल।
चैन से तान कर सोना नसीबो में न आशिक के,
इश्क की आग में मन को जलाना है बड़ा मुश्किल।
यार जो ख़ास हो अपना वही करता दग़ाबाजी,
चलन बदला जमाने का निभाना है बड़ा मुश्किल।



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