दोस्तों बुरा मत मान जाना कुछ कड़वा सच है।
देखिये ये कैसी विडम्बना है,
धर्म की हर सीमा का उलंघन होता है,
मनन के नाम पे मनोरंजन होता है।
मस्ती में झूमते ताल बजाने वाले,
अधिकतर नशे में भजन गाने वाले।
बाबा जी आजकल पूरी रसोई देखते है,
बड़ी शान से टी वी पे मसाले बेचते है।
कुछ बाबा जी नेट को भी साथ लेते है,
मन्त्र का ताला खोलने का पासवर्ड देते है।
कुछ बाबा तो नये नये रंग दिखाते है,
अपने भक्तों को लाल हरी चटनी खिलाते है।
लगन लगी लोग रोज सत्संग में जाते है,
माँ बाप को वृदाआश्रम में छोड़ आते है।
चाव से रावण का पुतला तो बनाते है,
अफ़सोस जलाने को राम जी न आते है।
नारें लगाते नारी को सब अखित्यार है,
वो ही नारी पे करते खूब अत्याचार है।
बुरी नीयत खुद को दिखाते सयाने से है,
सही मायनों में एक आँख से काने से है।
भाई भतीजावाद नही का नारा लगाते है,
तभी तो नेता मुख्यमंत्री पत्नी को बनाते है।
देखो तो ये कैसा दिलचस्प तमाशा है,
नेता बन के आम आदमी खास हो जाता है।
देश में गरीब बेचारा फूट फूट कर रोता है,
यहां कुर्सी के लिए बहुत कुछ होता है।
भारत में बरबादी की बड़ी लम्बी कहानी,
फिर कभी सुन लेना रैना"की जुबानी। रैना"