रविवार, 26 अप्रैल 2015

122-122-122-122
नही है बहाना न कोई ठिकाना,
दुखी है मुसाफिर कहीं दूर जाना।
सहारा न कोई प्यारा न कोई,  
सुनेगा न कोई तिरा ये तराना। रैना"



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