sufi tadka
रविवार, 26 अप्रैल 2015
तेरी आंखों से छलके जाम,
खोले जुल्फें ढल जाये शाम,
गुलफिशां के जो हैं दीवाने,
रैना"उनका तो काम तमाम। रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें