तूने जहाँ को बेहतर ढंग से है सजाया माता,
हर गुलशन को फूलों से है महकाया माता,
हर किसी की तूने ख़ुशी से झोली भर दी माँ,
पर मेरे हिस्से में गम ही गम आया माता।
क्या खता हुई है मुझसे कुछ तो बता मेरी माँ,
कैसे कटेगी मेरी पीरा जरा समझा मेरी माँ।
मेरी माँ -----जरा समझा मेरी माँ ------
चारो तरफ है छाया अन्धेरा,
साथ छोड़ गया साया भी मेरा,
मेरे सोते हुए मुकद्दर को अब तो जगा मेरी माँ,
मेरी माँ -----मेरी माँ -----जरा समझा ----रैना"
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