मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

खाली तस्वीर में उल्फ़त का रंग भरना है,
इरादा ये हम को सौदा -ए -दिल करना है
पर किरायेदारों पे न विश्वास है मुझे,
घर के असली मालिक की तलाश है मुझे।
जामे इश्क पीने की हसरत हुई जवान,
दीदारे यार की तलब प्यास है मुझे।
इस मर्ज की दवा तबीबो मुझे बता,
हल्का हल्का दिल में दर्द खास है मुझे।
छोड़ दिया मैंने अब उसको भी ढूंढना,
वो मेरे दिल में रहता एहसास है मुझे।
रैना"तैयार हो जा अब अपने घर चले,
बेवफा जिन्दगी न आई रास है मुझे। रैना"

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