शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

रोती भारत माँ को चुप कराने वाला कोई नही,
जख्म देने वाले महरम लगाने वाला कोई नही।
नेता खद्दरदारी व्यापारी बनगे भरष्टाचार के,
मां को लुटने वाले सारे बचाने वाला कोई नही।
अपनी अपनी पड़ी सब को देश का कोई फ़िक्र नही,
भाषण दें वाले सब गरीबी हटाने वाला कोई नही।
पढ़ लिख कर भी युवा निरंतर आत्महत्या कर रहे,
जान तो उनकी बचे नौकरी दिलाने वाला कोई नही।
रैना"सच ये कहता बाड़ ही खेत को खा रही,
भगवान के सिवा भारत को बचाने वाला कोई नही। रा

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