हमने तो कई बार तेरी नजर उतारी है,
तुम्हे यकीन नही ये गल्ती तुम्हारी है,
हम तो फ़िदा है तुझ पे दिलो जान से,
नाम तेरे कर दी अपनी उम्र सारी है। रैना"
तुम किरण हो उजाला तुम्हारी फितरत है,
कुछ भी कह देना ये जमाने की आदत है,
अपनी रौशनी से नहला दो सारे आलम को,
चलती रहे कलम तुम्हारी ये भी इबादत है। रैना"
तुम्हे यकीन नही ये गल्ती तुम्हारी है,
हम तो फ़िदा है तुझ पे दिलो जान से,
नाम तेरे कर दी अपनी उम्र सारी है। रैना"
तुम किरण हो उजाला तुम्हारी फितरत है,
कुछ भी कह देना ये जमाने की आदत है,
अपनी रौशनी से नहला दो सारे आलम को,
चलती रहे कलम तुम्हारी ये भी इबादत है। रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें