सोमवार, 20 मार्च 2017


है जल तो आजकल,
गर हो न जल तो आज न कल।
जल जीवन जल बहार है,
जल के बिना सब बेकार है।
उसने रचा ये ऐसा संसार है,
जल की हर किसी को दरकार है।
जल है तो सांस है,
साँस है तो आस है,
आस है तो प्यास है,
प्यास बुझाने को जल ही ख़ास है।
लेकिन न समझ समझ न पाते है,
जल को हम बेवजह ही बहाते है।
जितने से नहाते उससे  ज्यादा फैलाते है।
समझ जाओ न जल को फैलाओ,
जितने की जरूरत उतना प्रयोग में लाओ।
गर तुम ऐसी समझदारी दिखाओगें,
जल नही तुम खुद को ही बचाओगें।
आओ हम मिलझुल अपना फर्ज निभाये,
व्यर्थ में न जल की एक बूंद भी बहाये,
खुद समझे औरों को भी समझाये।
जल है तो आज ,जल है तो कल है,
जल को बचाना समस्या का हल है।   रैना"




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