mere khas dosto ke liye
क्यों खफ़ा सा रहे लब हिला तो सही,
क्या खता है मेरी कुछ बता तो सही।
है धुंआ सा उठा फिर हवा सी चली,
आग दिल में लगी अब बुझा तो सही।
दीद की अब तलब है लगी ओ सनम,
मुख से चिलमन कभी तू हटा तो सही।
इश्क़ हासिल हुआ गर नसीबा भले,
तीर दिल पे मेरे तू चला तो सही।
साथ तेरे चले गर इनायत करे,
सो रहे हम हमें तू जगा तो सही।
भ्रम रैना क्यों हुआ है तुझे ये बता,
खुद को इन्सान पहले बना तो सही। रैना"copy@@
क्यों खफ़ा सा रहे लब हिला तो सही,
क्या खता है मेरी कुछ बता तो सही।
है धुंआ सा उठा फिर हवा सी चली,
आग दिल में लगी अब बुझा तो सही।
दीद की अब तलब है लगी ओ सनम,
मुख से चिलमन कभी तू हटा तो सही।
इश्क़ हासिल हुआ गर नसीबा भले,
तीर दिल पे मेरे तू चला तो सही।
साथ तेरे चले गर इनायत करे,
सो रहे हम हमें तू जगा तो सही।
भ्रम रैना क्यों हुआ है तुझे ये बता,
खुद को इन्सान पहले बना तो सही। रैना"copy@@
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