बुधवार, 29 मार्च 2017

भक्तों जय जय माँ
माँ चंद्रघंटा भव तारणी, भक्तों के भाग्य संवारनी,
तेरे भक्तों की सुन ले पुकार माँ,
आ जा हो के शेर सवार माँ।
तेरे भक्तों की----------
दीन धर्म की हो रही हानि बढ़ रही परेशानी माँ,
नैतिकता का पतन हुआ स्वभू सिद्ध अज्ञानी माँ,
धर्म कमाई का साधन है,हो रहा घना तिरस्कार माँ।
तेरे भक्तों की----------
हर मन में है उठी दीवारे अब रिश्ते पीछे छूट गये,
प्रेम प्यार के मजबूत बन्धन थे वो भी अब टूट गये,
घर घर में घमासान सा हर दिन होती तकरार माँ।
तेरे भक्तों की----------
हाथ जोड़ करे विनती इक बार माँ अम्बे आ जाओ,
चारों तरफ फ़ैल गया अंधकार को माँ मिटा जाओ,
तड़फ रहे माँ तेरे बच्चें  विनती करो स्वीकार माँ।
तेरे भक्तों की-------------------------------"रैना"@@@@
सुप्रभात जी -------------------------जय जय माँ







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