एक और सूफी गीत,
दिल मेरा कही लगता नही
साजन मोरे रूठे है,
छा गये है गम के बादल,
ख्वाब अरमान टूटे है.
साजन मोरे.........
उसके दम से ये जीवन,
पर न मस्त बहारें है,
रात चांदनी उदास हुई,
नजारें भी गम के मारे है, ,
साजन की बेरुखी का असर,
हम बन गे फरेबी झूठे है.
साजन मोरे रूठे................."रैना"
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