रविवार, 29 अप्रैल 2012

sajan moh se ruthhe hai

एक और सूफी गीत,
दिल मेरा कही लगता नही 
साजन मोरे रूठे है,
छा गये है गम के बादल,
ख्वाब अरमान टूटे है.
साजन मोरे.........
उसके दम से ये जीवन,
पर न मस्त बहारें है,
रात चांदनी उदास हुई,
नजारें भी गम के मारे है, ,
साजन की बेरुखी का असर,
हम बन गे फरेबी झूठे है.
साजन मोरे रूठे................."रैना" 

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