अब तो हर पल बेचैनी है,
गुजर गये वो दिन फुरसत के,
मतलब की सब बात करे है,
हाल बुरे है अब उल्फत के.
नेता अब खुदगर्ज हुये है,
जनता की फिकर न करते है,
दीवाने ये शौक़ीन हुये,,
भूखे दौलत ओ खिदमत के.
रैना क्या क्या बात करे अब,
सारा ही आवा बिगड़ गया,
अधिकारी साइन न करे है,
बाबू न करे बिन रिश्वत के........"रैना"
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