sufi tadka
सोमवार, 30 अप्रैल 2012
asar kam kisi pe jyadahia
गर इस कद्र न गम होते,
फिर तो हम ही हम होते.
जो तुम अपना कह देते,
नैना न कभी नम होते.
गर होती रहमत तेरी,
बेवकत न बेदम होते.
"रैना"बैठा सोचे है,
काश करीब सनम होते....."रैना"
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