जमाने से अलग अन्दाज रखते है,
लबों पे हम सजा के साज रखते है,
कदम रखते धरा पे सर झुका रहता,
मगर है हौसला उम्मीद भी परवाज रखते है....."रैना"
लबों पे हम सजा के साज रखते है,
कदम रखते धरा पे सर झुका रहता,
मगर है हौसला उम्मीद भी परवाज रखते है....."रैना"
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