इक तू रूठा ये जग रूठा,
लोग फरेबी कहते झूठा.
मेरी आशा आशा न रही,
टूटें अरमां सपना टूटा.
कोई काम सिरे न चढ़े है,
ऐसा लगता भाग्य फूटा.
"रैना को तलब बहार मिले,
पतझड़ में है गुलशन सूखा......"रैना"
लोग फरेबी कहते झूठा.
मेरी आशा आशा न रही,
टूटें अरमां सपना टूटा.
कोई काम सिरे न चढ़े है,
ऐसा लगता भाग्य फूटा.
"रैना को तलब बहार मिले,
पतझड़ में है गुलशन सूखा......"रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें