दोस्तों क्या ये सच है
किसी बीमार की बंद दुकान होने लगी है,
ग़ज़ल भी आज कल बेजुबान होने लगी है,
नही अब बज़्म में कुछ मजा कहे तो किसे क्या,
करे क्या जिन्दगी इम्तहान होने लगी है। रैना"
किसी बीमार की बंद दुकान होने लगी है,
ग़ज़ल भी आज कल बेजुबान होने लगी है,
नही अब बज़्म में कुछ मजा कहे तो किसे क्या,
करे क्या जिन्दगी इम्तहान होने लगी है। रैना"
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