sufi tadka
शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016
चढ़े दिन की मस्ती में चूर हम रैना"
अंधेरी रात का करते फ़िकर ही नही। रैना"
कल के लिये सोचा न गया,
दिल मचलता रोका न गया।
आबाद होते
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