दोस्तों पढ़ना जरा गौर से
बैठ अरमानों के संग सारी रात रोना हुआ,
शब गुजारी आंखों में न इक घड़ी सोना हुआ।
चाहत कुँआरी रह गई मेहंदी लगी है हाथों में,
किसी को पाने के लिये खुद ही खोना हुआ।
याद ने जब आ के दस्तक दी दिल के द्वार पे,
आंसुओं की धार से फिर दागे दिल धोना हुआ।
डूबा गहरी सोच में खुद को तसल्ली दे रहा,
क्यों है तू परेशान रैना"जो लिखा होना हुआ। रैना"@
बैठ अरमानों के संग सारी रात रोना हुआ,
शब गुजारी आंखों में न इक घड़ी सोना हुआ।
चाहत कुँआरी रह गई मेहंदी लगी है हाथों में,
किसी को पाने के लिये खुद ही खोना हुआ।
याद ने जब आ के दस्तक दी दिल के द्वार पे,
आंसुओं की धार से फिर दागे दिल धोना हुआ।
डूबा गहरी सोच में खुद को तसल्ली दे रहा,
क्यों है तू परेशान रैना"जो लिखा होना हुआ। रैना"@
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें