मेरे बारे सोचा क्या है,
मेरा तुझ से रिश्ता क्या है।
हमने तुझ में रब देखा है,
तुझ को मुझ में दिखता क्या है।
समझे हम तो कैसे समझे,
तेरे दिल में चलता क्या है।
उठती दुर्गंध जी घबराये,
मेरे घर में जलता क्या है।
इन्सां गल्ती कब माने है,
उसने खुद का बदला क्या है।
परदे में हो कुछ तो बोलो,
तुझको हम से शिकवा क्या है।
तुझको "रैना"ने मिलना है,
क्यों रूठे हो मिलता क्या है। रैना"
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