जीवन को खुश गवार किसी ने नही किया,
यूं खुद से इश्क प्यार किसी ने नही किया।
दावा करे तमाम मुलाकात उस से की,
सच में दीदारे यार किसी ने नही किया।
बेशक उससे मिलन की चाह सी रही,
लेकिन सब्र इन्तजार किसी ने नही किया।
है झूठ पसंद लोग सच से खफा खफा,
आबाद वो संसार किसी ने नही किया।
कब शाम हो हसीन रहती ये खबर नही,
काली रात का उपचार किसी ने नही किया।
रैना"तमाम लोग भटकेगे यहां वहां,
अब तक भव को पार किसी ने नही किया। रैना"
यूं खुद से इश्क प्यार किसी ने नही किया।
दावा करे तमाम मुलाकात उस से की,
सच में दीदारे यार किसी ने नही किया।
बेशक उससे मिलन की चाह सी रही,
लेकिन सब्र इन्तजार किसी ने नही किया।
है झूठ पसंद लोग सच से खफा खफा,
आबाद वो संसार किसी ने नही किया।
कब शाम हो हसीन रहती ये खबर नही,
काली रात का उपचार किसी ने नही किया।
रैना"तमाम लोग भटकेगे यहां वहां,
अब तक भव को पार किसी ने नही किया। रैना"
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