sufi tadka
रविवार, 18 दिसंबर 2016
तू फूल है थोड़ा और निखर जा,
शुश्बू बन के हवा में बिखर जा,
सरे शहर में चर्चा कुछ कर ऐसा,
रह ले यहां फिर चाहे तू उधर जा।रैना"
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