इक सूफी रचना दोस्तों के लिए
सुन मैं रिन्द तू साकी है,
अब दूर करनी उदासी है।
जी भर के पिला मुझको,
पीने की हसरत बाकी है।
देखू तो है जायका कैसा,
मैंने अब तक न चाखी है।
दिल के घर में तू रहता,
मेरा जन्मों का साथी है।
चेहरे से हटा ले चिलमन,
तुझको शर्म क्यों आती है।
बेशक ये अहसास मुझको,
रैना"इक दीया तू बात्ती है। रैना"
रिन्द =शराबी, साकी =पिलाने वाला
जायका =स्वाद ,चिलमन =पर्दा
सुन मैं रिन्द तू साकी है,
अब दूर करनी उदासी है।
जी भर के पिला मुझको,
पीने की हसरत बाकी है।
देखू तो है जायका कैसा,
मैंने अब तक न चाखी है।
दिल के घर में तू रहता,
मेरा जन्मों का साथी है।
चेहरे से हटा ले चिलमन,
तुझको शर्म क्यों आती है।
बेशक ये अहसास मुझको,
रैना"इक दीया तू बात्ती है। रैना"
रिन्द =शराबी, साकी =पिलाने वाला
जायका =स्वाद ,चिलमन =पर्दा
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