सोमवार, 19 सितंबर 2011

tujhse

तुझसे प्यार करके मुझे हुआ ये हासिल,
दर्द बनके हो गया तू जिन्दगी में शामिल,
जिसको माना मैंने अपने जिगर का टुकड़ा,
वो ही निकला जालिम मेरे दिल का कातिल. 
बचना अब तो  मुशिकल डूबना ही निश्चित,
वो ही पार लगा दे वैसे दूर बहुत है साहिल.
 खुदा जनता है मैंने कोई कसर नही छोड़ी,
फिर भी नही वो पिगला पत्थर दिल जाहिल.
"रैना" की मत पूछो वो भटका हुआ है राह से,
जा रहा कही वो कही और है उसकी मंजिल."रैना"

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