माँ की स्तुति दोहे
श्रदा भक्ति प्रेम से जो, माँ का ध्यान लगाये,
बड़भागी उस जीव का, जन्म सफल हो जाये
ओ भक्तों जन्म ---------------
ज्योत पवित्र है मइया की, दूर अँधेरा भगाये.
श्रदा प्रेम से है जहाँ जले,मइया वही पे आये.
ओ भक्तों मइया--------------
उच्चे पर्वत शिखर पे, मइया का है दरबार,
सेवक दर्शन को चले, हो रही जय जयकार
.मइया की हो रही --------------
अकबर को जब अहम हुआ,आया माँ के दरबार,
सोने को लोहा था कर दिया,तोड़ दिया अहंकार.
मइया ने तोड़ दिया----------------
ध्यानु माँ के दर आया,हाथ लिए तलवार,
शीश काट कर ये कहे, भेंट करो स्वीकार.
मइया जी भेंट करो ------------- "रैना"