सोमवार, 28 नवंबर 2016

नारी पे जिसने भी बुरी नजर डाली है,
उसने अपने घर को आग लगा ली है,
रावण दुर्योधन आसा राम या तेजपाल,
सब ने ही खुद अपनी अर्थी निकाली है।
नारी पूज्नीय ये आदि शक्ति का अंश है,
नारी के दम से तो आगे बढ़ता वंश है,
मां बहन बेटी बन बांटती ममता प्यार,
दुखी हो चंडी बन कभी करती विध्वंश है।
"रैना" नारी का जिसने भी मान बढ़ाया है,
उसने हर क्षेत्र में रुतबा अव्वल ही पाया है,
पुरुष प्रधान समाज फिर भी नही समझता,
ये विश्व आदि शक्ति मां की काया माया है। रैना"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें